चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२-तब महरने भाटसे कहा कि तुम्हीं दौड़कर लोरकके पास जाओ और उसे बुला लाओ। भाट तत्काल घोड़ेपर सवार होकर लोरकके पास पहुँचा और महरका सन्देश कह सुनाया। सुनते ही लोरक युद्धमें जानेके लिए तैयार हो गया। यह देखकर उसकी पत्नी मैना उसके सामने आकर खड़ी हो गयी और युद्धमें जानेसे उसे रोकने लगी। लोरकने कहा- मुझे युद्धमें जानेके लिए तिलक लगाकर आशीर्वाद दो कि मैं बाँठा (रूपचन्दका एक वीर) को मारकर घर आऊँ। मैं लौटकर तुम्हें सोनेके गहने बनवा दूँगा और मोतियोंसे तेरी माँग भराऊँगा। तब पत्नीने विदा दी और लोरक अखपीक पर गया। अखपीसे युद्ध-कौशलकी दीक्षा लेकर वह महरके पास पहुँचा। महरने उसे पानक तीन बीड़े दिये और कहा कि तुम जीतकर आओगे तो तुम्हें सुसज्जित घोड़ा भेंट करूँगा। (१२१ १२७) १३- लोरक अपनी सेना लेकर युद्ध क्षेत्रकी ओर चला। उसकी सेना देखकर रूपचन्द भयभीत हो गया और दूत भेजकर कहलाया कि एक-एक वीर आपसमें लड़े तो अच्छा हो। महरने उसकी बात मान ली तदनुसार दोनों ओरके वीर एक-एक कर सामने आकर लड़ने लगे। अन्तमें रूपचन्दकी ओरसे बाँठा आगे आया और महरने उसका सामना करनेके लिए लोरकको भेजा। युद्धमें बाँठा हार गया। फिर लोरक और रूपचन्दमें युद्ध हुआ और वह हारकर भाग खड़ा हुआ। लोरकने उसका पीछा किया और उसे भगा दिया। (१२८ १४१) १४- युद्ध जीतकर महर गोबर पहुँचा और लोरक वीरको बुलाकर उसे पान का बीड़ा दिया और हाथीपर बैठाकर उसका जुलूस निकाला। रानियाँ धौरहरपर खड़ी होकर उसे देखने लगीं। ब्राह्मणोंने लोरकको आशीर्वाद दिया गोवरमें आनन्द मनाया जाने लगा। (१४४) १५- चाँद भी अपनी दासी बिरस्पतको लेकर धौरहरके ऊपर गयी और उससे लोरकको दिखानेको कहा। बिरस्पतने उसे दिखाया। लोरकको देखते ही चाँद विकल होकर मूर्छित हो गयी। बिरस्पतने उसके मुखपर पानी छिड़का और बोली कि अपनेको सम्हालो। जो तुम्हारे मनमें है उसे कहो मैं उसे रात बीतते ही पूरा करूँगी। (१४५ १४८) १६- दूसरे दिन प्रातःकाल जब बिरस्पत आयी तो चाँदने कहा- जिसे मैंने कल देखा उसे या तो मेरे घर बुलाओ या मुझे उसके निकट ले चलो। बिरस्पतने कहा कि मैं लोरकको अपने घर बुलानेका उपाय तुम्हें बताती हूँ। तुम अपने पितासे गोवर के नागरिकोंको ब्योनारपर बुलानेके लिए कहो। यह सुनते ही चाँद महरके पास गयी और बोली कि मैने मनौती मानी थी कि जब मेरे पिता रण जीतकर आयेंगे तब सब लोगोंको निमंत्रित कर भोजन कराऊँगी। चाँदकी बात सुनते ही महरने भाट बुलाकर सारे गोवरमें ब्योनारका निमंत्रण भेज दिया और नाई दसों दिशामें जाकर निमंत्रण दे आय। महरने बहेलियोंको शिकार करने और बारियोंको पत्ते लानेके लिए भेजा।