चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 63, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें४६ शयनागार देखा । (यहाँ कविने चीसगड़ीकी चित्रकारी, सुगन्ध, शय्या आदिका वर्णन किया है ।) (२ १०) २५—लोरकने चाँदाको जगाया । और तब चाँद और लोरकमें ठण्ड-उत्तपकी बात हुई । पहले तो चाँदने लोरकको धिक्कारा फिर उठकर अपना प्रेम प्रकट किया और अन्तमें दोनों हँसी मजाक और केलि-क्रीडामें रत हो गये । (२ ८-२१५) २६—सुबह हुई तो चाँद भयभीत हुई और इसके पूर्व कि दासियाँ आवें, उसने लोरकको शय्याके नीचे छिपा दिया । जब दासियाँ मुँह धोनेके लिए पानी लेकर आयीं तो उन्हें चाँदकी अस्त-व्यस्त अवस्था देखकर समझते देर न लगी कि 'सँवर फूलपर बैठा था' । चाँदने बात बनानेकी चेष्टा की कि रातको बिल्ली कमरेमें घुस आयी थी और मेरे ऊपर कूद पड़ी । उसके नख लग गये । वह तो भाग गयी, लेकिन रातभर मुझे नींद नहीं आयी । विरहस्तने जाकर महरिको सूचना दी कि चाँद रातमें बिल्लीके कूदनेके कारण डर गयी है । चलकर कोई उपाय कीजिए । सुनते ही माता पिता सब लोग जमा हो गये । चाँद और लोरक दोनों मन ही मन भयभीत होने लगे । किसी किसी तरह शाम हुई और चाँदने लोरकको बाहर निकाला और प्रतिज्ञाकी कि मैं तुम्हारी विवाहिता सदृश हूँ और तुम मेरे विवाहित पति हो । यह कहकर लोरकको विदा किया और उसे रास्ता दिखाने नीचे आयी । लोरक महलसे निकलकर तेजीसे चला । इतनेमें द्वारपाल लाँघा और पदचाप सुनकर बाहर आया । चाँदने उससे कहा कि मैं फूल छूनेके लिए बाग देखनेको फेरी लगाने आयी हूँ । (२१६-२३१) २७—चाँद अपने नौहरमें पहुँचकर विचार करने लगी कि वह दिन कब आवेगा जब लोरकसे फिर भेंट होगी । राशि गणना करनेपर उसे ज्ञात हुआ कि अब उससे उस दिन मिलना होगा जिस दिन वह उसे गङ्गा पारकर हरदी ले जायेगा । (२३६) २८—लोरक जब घर पहुँचा तो मैनाने पूछा कि तुमने रात कहाँ बितायी किस स्त्रीके साथ भोग विलास किया । लोरकने हँसकर बात टाल दी और कहा कि राजा पाश दलनेमें सारी रात बीत गयी । (२३४) २९—महर और महरिको ज्ञात हो गया कि रातमें महलमें कोई पुरुष आया था । फिर यह बात दास-दासियों नाई-बारीके मुखसे गाँवभरमें घर घर फैल गयी । मैना के कानमें भी उसकी भनक पड़ी । सुनते ही वह अत्यन्त व्यथित हो उठी । मैना की यह अवस्था देखकर पण्डितने उससे उसका कारण जानना चाहा और उसकी बात सुनकर उसे समझानेकी चेष्टाकी । लोरकको भी कुछ आभास मिला कि बात मैनापर प्रकट हो गयी है । तब वह उससे प्रेम भरी बातें करने लगा । मैना क्रुद्ध हो उठी; दोनोंमें कहा सुनी हुई । पण्डितने बीचमें पड़कर मामला शान्त किया । ( १५ २४०) ३ —पण्डितने चाँदसे कहा कि असाढ की दूजको मयावीका पर्व आ रहा है । उस दिन लोग खाण्डार करके सोमनाथ की पूजा करें तो तुम्हारी मनोकामना पूरी