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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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होगी। वह दिन आया। सभी जातिकी स्त्रियाँ पूजा करने चलीं। चाँद भी अपनी रूपेशियाको लेकर मन्दिर गयी देवताकी पूजा की और मनोती मानी कि यदि लोरक पतिके रूपमें प्राप्त हो गया तो आपके कलशको घृतसे भरवाऊँगी। (२५०-२५४) ३१—मैना भी पालकीपर सवार होकर अपनी सखियों सहित मन्दिरम आयी और देवताकी पूजाकी और उन्हें अपनी व्यथा कह सुनायी। पूजा कर जब वह बाहर निकली तो उसके कुम्हलाये हुए रूपको देख चाँदन हँसकर उदासीका कारण पूछा। मैनाने उसका उत्तर दिया और अपने मनका रोष चाँदपर प्रकटकर दिया। फलतः हँसीकी बात उत्तर प्रतिउत्तरमें उत्तरोत्तर गम्भीर होती गयी। चाँद और मैनाम पहले गाली गलौज और फिर मारपीट होने लगी। तब लोरकने आकर उन दोनोंको अलग किया। दोनों ही स्त्रियाँ अपने-अपने घर लौटीं। (२५५-२७४) ३२—मैनाने घर आकर मास्तिनको बुलाया और उसे चाँदकी शिकायत लेकर महरके पास भेजा। मास्तिनने जाकर महरसे चाँदकी सारी बात कही। उसे सुनकर महरि अत्यन्त क्रोधित और क्षुब्ध हुए। (२७१-२७८) ३३—चाँदने बिरस्वत से कहा कि जो कुछ बात ढँकी छिपी थी, वह अब सब लोगों पर प्रकट हो गयी। जिस बातसे मैं डर रही थी वही बात सामने आ गयी। अब तो यही रह गया कि या तो देशकी गालियाँ सुनूँ या फिर कटार भोंककर मर जाऊँ। तुम लोरकसे जाकर कहो कि आज रातको वह मुझे लेकर भाग चले नहीं तो प्रातःकालमें प्राण तज दूँगी। बिरस्तन जाकर लोरकसे चाँदका संदेश कहा। पहले तो लोरक भागनेपर राजी नहीं हुआ पर बादम बिरस्वतके समझाने-बुझानेपर चाँदको ले जानेको तैयार हो गया। पण्डितसे शुभ घड़ी पूछकर उसने आधी रातको चलनेका निश्चय किया। (२७९-२९) (इस अग्राऊ कुछ कडवक अप्राप्य हैं अतः घटनाका स्पष्ट रूप सामने नहीं आता।) ३४—रात हुई तो लोरक आया और वरहा (रस्सी) फेंककर अपने आनेकी सूचना चाँदको दी। चाँद उसकी प्रतीक्षा कर ही रही थी। आभरण मानिक मोती साथ लेकर वह रस्सीके सहारे नीचे उतर आयी। बरसातकी घोर अँधेरी रात्रिमें दोनों चल पड़े। रास्तेम जावन कहा कि हमारे भागनेकी खबर यदि बावनको मालूम हो गयी तो उसके देखते कोई भागकर जा नहीं सकता। वह देखते ही मछलीकी तरह मार डालेगा। लोरकने कहा—तुम मुझे इस तरह मत डराओ। अभीतक मैंने रूपचन्द और बाँठाको मारा है अब बावनकी बारी है। (२९१-२९२) ३५—लोरकके भाग जानेपर उसकी पत्नी मञ्जरी (मैना) उठक अह्र शब्दोंको लेकर रोती रही। (२९३) ३६—लोरक और चाँदने काले वस्त्र पहन लिए। लोरकने अपने दोनों हाथोंमें खाँड और चाँदने अपने हाथमें धनुष लिया और दोनों चल पड़े। डंगवरसे दस कोस दूर पहुँचे और रास्तेको कटवाकर चलने लगे। वहा लोरकका भाई कँवर रहता था। उसने लोरकको आते देखा और उसकी ओर भागा। लेकिन चाँदको पीछे-पीछे