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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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४८ व्याघ्र हैरान ठिठक गया । गोरखने बोला कि तुमने यह बहुत बुरा किया । और वह उसकी भर्त्सना करने लगा । यह सुनकर चाँदेने कंवरूका समझानेकी चेष्टा की तो कंवरू उसकी भी भर्त्सना करन लगा । अन्तमें गोरखने यह कहकर कंवरूसे विदा ली कि कार्तिक मासतक लौट आऊँगा । (२१४ । ) १७—वहाँसे दोनों तेजीके साथ आगे बढे । जब शाम हुई तो गंगाके घाटपर कठिन समझकर पेड़के नीचे सो रहे । सुबह दोनों पाटपर किनारे आये । (बीचके कड़वक अप्राप्य हैं, अतः कथाका क्रम कुछ अस्पष्ट है ।) गोरख एक ओर छिप गया और चाँद तटपर खड़ी होकर अपना प्रदर्शन करने लगी । उसे देखते ही एक मल्लाह निकट आया । चाँदेको अरसेसे देख उसकी उत्सुकता आयी और नाव लेकर उसके पास आया । चाँदेके रूपको देखते ही वह उसपर मुग्ध हो गया और उसे नावपर बैठाकर पार ले चला । गंगाके बीचमें केंवटने उससे पूछा कि तुम कौन हो ? घर कहाँ है ? नदीके आसपास कोई गाँव नहीं है फिर तुम रातको कहाँ ठहरी थीं ! चाँदेने कहा—मैं घरसे रूठकर चली हूँ और रातभर चलकर अकेली ही यहाँतक आयी हूँ । यह बातें हो ही रही थीं कि गोरखने पानीमेंसे सर बाहर निकाला और केवट को पानीमें ढकेलकर स्वयं नावपर सवार होकर चाँदेको लेकर चल पडा । ( १ १५ ७) १८—इतनेमें बाबन आ पहुँचा और केवटसे पूछने लगा—इस रास्ते मेरे दो दास-दासी आये हैं उन्हें तुमने देखा है ! यह सुनकर केवट हँसा और बोला—यहाँ तो एक कुँवर और कुँवरी आये थे । पुरुष छिप गया और स्त्री दिखायी पड़ी । उसकी ओर आकृष्ट होकर मैं वहाँ आया । वे लोग नाव लेकर उस पार गये हैं । लेकिन वे तुम्हारे दास-दासी नहीं हो सकते । इतना सुनते ही बाबन पानीमें कूद पड़ा और गोरखका पीछा किया । जबतक बाबनने नदी पार करे तबतक गोरख छ कोस जा पहुँचा । बाबनने दौड़कर उनका पीछा किया और दस कोसपर उन्हें जा पकड़ा । गोरखपर उसने तीन बाण चलाये पर वे तीनों ही बेकार गये । तब हार मानकर गोरखसे कहकर कि यह स्त्री तुम्हारी हुई बाबन अपने घर लौट गया । ( १ ८ ३१६) १९—बाबन गोबरकी ओर गया गोरख और चाँद आगे बढे । रास्तेमें उन्हें विद्यादानी नामक एक ठग मिला जिसने दानके बहाने स्त्री (चाँद) की माँग की । इसपर गोरखने उसके हाथ और कान काट लिये और उसका मुँह काला कर केथोंमें मेस बाँधकर छोड़ दिया । (कुछ कड़वकोंके प्राप्त न होनेसे यह घटना बहुत अस्पष्ट है।) (३१५ ३१२) २०—विद्याने आकर गोरखके विरुद्ध राज दरबारमे परिवाद किया । राजाने अपने मन्त्रियोंसे परामर्श कर गोरखकी बुलानेके लिए ब्राह्मणोंको भेजा । गोरखने आकर राजासे सारी बात कह सुनायी । सुनकर राजाने उसे घोड़ा आदि देकर सम्मानित किया और कहा कि चाहो तो यहाँ रहो अन्यथा जहाँ इच्छा हो जा सकते हो । गोरख राजासे विदा लेकर चला और एक ब्राह्मणके घर जाकर ठहरा । वहाँ गोरख