चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलोर चाँद दोनों फूलोंका सेज बिछाकर सोय। रातमें सुगन्धसे आकृष्ट होकर एक साँप आया और चाँदको काट लिया। (१२३-१३२) ४१—साँपके डँसते ही चाँद बेहोश हो गयी। लोरक सात दिनोंतक शोकाकुल होकर विलाप करता रहा। तब एक दिन एक गुनी आया और उसने मन्त्र पढ़ा और चाँद जीवित हो उठी। फिर वे दोनों हरदीकी ओर चले। (१३३-१३७) ४२—(१३८ से १४३ के बीच केवल दो कड़बक उपलब्ध हैं जिनसे वास्तविक घटनाका अनुमान नहीं होता केवल इतना ही पता लगता है कि लोरकको कोई युद्ध करना पड़ा था। उसने शत्रुओंको मार भगाया। पश्चात् दोनों पुनः हरदी- की ओर चले।) ४३—चलते-चलते एक बनखण्डके बीच शाम हो गयी और ये दोनों एक पाकरके पेड़के नीचे रुक गये और खा-पीकर सो रहे। रातमें पुनः साँपमे चाँदको डँस लिया। उसके वियोगमें लोरक घोर विलाप करने लगा। दिन बीता रात हुई और वह रोता ही रहा। दूसरे दिन सुबह लोरकने चिता तैयार की और उसपर चाँदको लेकर बैठ गया। इतनेमें एक गुनी आया। उसे देखकर लोरक उसके पाँवपर गिर पड़ा उसने उससे चाँदको जीवित कर देनेका अनुरोध किया और अपना सर्वस्व देनेको कहा। गुनीने लोरकको आश्वस्त किया और मन्त्र पढ़कर पानी छिड़का। तत्काल चाँद का विष उतर गया और वह उठ बैठी। लोरकने सारे आभूषण उतारकर गुनीको दे दिये। (१४५-१६ ) ४४—गारड़ी जाते हुए चाँद और लोरकसे कहता गया कि पाटन डेरा मत जाना और जाना तो दाहिने रास्तेको अपनाना। लेकिन उन्होंने उसकी बात न मानी और चल पड़े। शाम होते-होते वे सारंगपुर पहुँचे। यहाँ लोरकके साथ क्या बीती यह व्यक्त करनेवाले कड़बक हमें उपलब्ध नहीं हैं। किन्तु राणत सारस्वतने जो कथासार दिया है उसके अनुसार सारंगपुर पहुँच कर लोरकने वहाँके राजा महीपतिके साथ जुआ खेला। (युद्धका वृत्तान्त प्राप्त नहीं है पर लोक-कथाके अनुसार लोरक अपना सब-कुछ हार गया और अन्तमें चाँदको भी दाँवपर लगा दिया और उसे भी हार गया। तब चाँदने अपनी चातुरीसे उन्हें पुनः एक बार खेलनेको कहा और महीपतिको अपने सौन्दर्यपर प्रति ऐसा आकृष्ट कर दिया कि वह खेलकी ओर समुचित ध्यान न दे सका और हार गया।) पश्चात् महीपतिको लोरकने मार डाला। महीपतिके मरने पर उसके भाई अहिपतिने रंग फेर दिया। राणत सारस्वतके दिये हुए कथासारके अनुसार पद्मनी मायासे लोरकका दिग्वाइ देना बन्द हो गया। तब चाँदने वीरतापूर्वक हरको मार डाला। (१६०-१७ ) ४५—महीपति और अहिपतिको पराजित कर चाँद और लोरक आगे चले तो सम्भवतः चाँदको पुनः एक बार सांपने काटा और वह मरकर पुनः जीवित हो उठी। (यह अंश अनुपलब्ध है। उपलब्ध कड़बक १७-४ इस घटनाके घटित होनेका अनु- मान मात्र होता है।) जब वह जीवित होकर उठी तो बोली कि देखो भाई कि पंपा ४