भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 69, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 69

५२ जा रहा है। जब तक वह यहाँ तक आवे, तुम लोग तैयार हो जाओ। यह सुनते ही गोवर नगरमें खलबली मच गयी। सब लोग अपनी अपनी फिक्र करने लगे। लेकिन मैनाको ऐसा लगा कि लोरक आ रहा है। उसने अपनी सास सोधिनसे कहा कि रात बीतते बीतते लोरकका कुछ न कुछ समाचार मिलेगा। रातको उसने लोरकके आनेका स्वप्न देखा है। (४१५-४१९) ५४-सुबह लोरकने माली बुलाया और गोवर जानेको कहा। और कहा कि यह मत कहना कि लोरकने भेजा है। अगर कोई पूछे तो कहना कि अपने आप आया हूँ। तदनुसार मालीने डोलचीमें फूल भर लिये और गोवरमें घर-घर डोल फिरा। फूलोंको देखते ही मैना रो उठी। बोली—फूल उसीको शोभा देता है जिसका पिय घर पर हो। मेरा पति तो परदेशमें बिराज रहा है। मुझे फूल पान कुछ अच्छा नहीं लगता है। फिर वह मालीसे पूछने लगी कि तुम कहाँसे आये हो ? इन फूलोंके बासमें तो मुझे लोरक जान पड़ता है। लगता है लोरकने ही तुम्हें भेजा है। माली बोला—मैं तो परदेशी हूँ और गोवर नगर देखने चला आया। मैंने अब तक तुम्हारे जैसा विरह किसीमें नहीं देखा। तुम अगर दूध लेकर बागमें आओ तो लोरकका समाचार मिलेगा वहीं उससे भेंट होगी। सुबह हुई और मैना अपनी दस सहेलियोंको साथ लेकर दूध कलसी लिये हुए बागमें पहुँची। दही खरीदनेके लिए लोरकने उन अहीरीनोंको बुलाया और मैनाको पहचान कर चाँदसे कहा कि जो सबसे पीछे आ रही है उसका दूध दही लेकर उसे दस गुना दाम देना और विदाईमें सोना चाँदी जैसा समझना देना। तदनुसार चान्दने दूध दही लेकर दाम दिलाया और उन सब दूध वालियोंका सीस सिंसौरा लेकर मौय मरवाया। उसने सिंदूर चन्दन किया पर मैनाने अपना शृंगार नहीं करने दिया। बोली—सिंदूर वह करे जिसका पति हो। मेरा पति तो हरदीमें सो रहा है। जब तक वह मुझे दबो हुए है तब तक मुझे इसकी इच्छा नहीं है। ऐसी कह कर वह अपना दुःख प्रकट करने लगी। जब मैना जाने लगी तो लोरकने रोक लिया और छेड़छाड़ कर उससे रातका भेद लेना चाहा। मैना बिगड़ उठी और क्रुद्ध होकर घर चली गयी। (४२०-४४५) ५५-दूसरे दिन सुबहको फिर अहीरीनें लोरकके शिविरमें गयीं। चाँदने सबको बैठाकर भीतर बुलाया और लोरककी करनी पूछने लगी। मैनाने कहा कि बारह महीने हुए वह चाँदको लेकर भाग गया। अगर कहीं चाँद मिलै तो उसका मुँह काला कर नगर भरमें फिराऊँ। यह सुन चाँद अपनी बड़ाई करने लगी। मैना भाँप गयी और लज्जित होकर चुप रही। लेकिन बातों बातोंमें बात बढ़ गयी और मैना चाँद दोनों परस्पर उल पड़ीं। तब लोरक वहाँ आया और उसने अपनेको प्रकट किया। मैना प्रसन्न हो उठी। लोरकने चाँदको डाँटा और दासियोंको आदेश दिया कि वे जाकर मैनाका शृंगार करें। उसे देखकर लोरक चाँदको भूल गया। रातको