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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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व्यतिरिक्त इस समयावधिको जिनका समय चौदहवीं शताब्दीका पूर्वार्द्ध समझा जाता है सुप्रसिद्ध रचना बयरनाफरमें लोरिकनाय्योक्त रूपमें हुआ है। दाऊदने अपनी कथाको लोक जीवनसे ही ग्रहण किया था यह उनके इस कथनसे भी सिद्ध होता है कि उन्होंने उसे किसी मलिक नयनसे सुनकर काव्यका रूप दिया। यह मलिक नयन कोई सामान्य नागरिक थे अथवा कोई विशिष्ट पुरुष, यह कहा नहीं जा सकता। असकरीने उनके सम्बन्धमें अनुमान करते हुए मुनीस-उल- कुलूब नामक ग्रन्थमें बिहार-निवासी सूफ़ी हुसेन नौशाह तौहीद१ जो चौदहवीं शताब्दीमें हुए थे, जीवन ग्रन्थमें उल्लिखित मौलाना नयनका उल्लेख किया है।२ पर यह कोरा अनुमान है। परशुराम चतुर्वेदीने अलीगढ़से प्रकाशित इस्लामिक कल्चर नामक पत्रिकामें छपे हबीबके किसी निबन्धके हवालेसे लिखा है कि चिराग़- ए-देहली शेख़ नसीरुद्दीनके एक मित्र पटना निवासी नाथू नामक कोई सज्जन थे जिन्होंने उन्हें एक बार उपवासके अवसरपर दो रोटियाँ दी थीं। अतः उनका अनु- मान है कि नाथू दाऊदके समकालिक हो सकते हैं। पर इस अनुमानमें भी कोई तथ्य नहीं है। नसीरुद्दीन दाऊदके गुरु ज़ैनुद्दीनके गुरु थे इस कारण उनके समकालिक नाथू दाऊदके समकालिक कदापि नहीं हो सकते। अभिप्राय और रूढ़ियाँ चन्दायन यद्यपि लोक-कथापर आश्रित प्रेम मिश्रित चरित-काव्य है तथापि उसमें कथा-साहित्यमें पाये जाने वाले अभिप्रायों और रूढ़ियोंकी कमी नहीं है। उनका सांगोपांग अध्ययन तो तभी किया जा सकता जब काव्यका पूर्ण रूप हमारे सामने होगा और कथा अपनेमें पूर्ण होगी। फिर भी कुछ अभिप्रायों और रूढ़ियों का तो हम रुख़ देख ही सकते हैं :— (१) क्लीब पति छोड़कर परपुरुषके साथ भाग जाना—अपभ्रंश काव्य रणनेहुरी महाकवि रन्नायणी नामक रानीकी कथा है जिसका पति राजरोगपर काम भोगमें विरत रहता था फलतः रानी कुपित होकर एक सामन्तके साथ भाग गयी। इतिहासमें भी इसी तरहकी एक घटना गुप्तकालमें प्राप्त है जिसकी चर्चा विशाखदत्तने अपने नाटक देवी चन्द्रगुप्तम्में की है। रामगुप्तकी क्लीवताके कारण उसकी पत्नी ध्रुवस्वामिनी चन्द्रगुप्तपर आसक्त हुई और चन्द्रगुप्तने रामगुप्तको मारकर ध्रुवस्वामिनीसे विवाह कर लिया। प्रस्तुत काव्यमें चाँद पतिकी काम-भोगके प्रति उदासीनताके कारण ही नायक आफ़त लोरकपर प्रति आसक्त होती है। (२) नारी द्वारा पुरुषको भगा ले जाना—नारी द्वारा किसी पुरुषको भगा ले जानेकी घटना असामान्य है फिर भी यह भारतीय कथाका एक जाना पहचाना अभिप्राय है। सम्पूर्ण महाभारतमें कुरूराजधानीमें एक प्रसंग है जिसपर एक स्त्री पुरुषको १. बयाज़ हज़रत शाहबाज़िया ३. वही टिप्पणी १ । २. डिस्क्रीप्टिव कैटेलॉग १. १६