छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 148, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 148
त्रयोदश खण्ड
सामावयवभूत स्तोभाक्षरसम्बन्धिनी उपासनाएँ
| भक्तिविषयोपासनं सामावयवसंबद्धमित्यतः सामावयवान्तरस्तोभाक्षरविषयाण्युपासनान्तराणि संहतान्युपदिश्यन्तेऽनन्तरं सामावयवसंबद्धत्वाविशेषात्— | सामभक्ति-विषयक उपासना सामावयवोंसे सम्बद्ध है । अतः यहाँसे आगे सामके एक अवयवमात्र स्तोभाक्षरविषयक अन्य संहत उपासनाओंका वर्णन किया जाता है, क्योंकि उनका भी सामावयवरूपसे [ सामभक्तिके साथ ] सम्बद्ध होना समान ही है— |
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अयं वाव लोको हाउकारो वायुर्हाइकारश्चन्द्रमा अथकारः । आत्मेहकारोऽग्निरीकारः ॥ १ ॥
यह लोक ही हाउकार है, वायु हाइकार है, चन्द्रमा अथकार है, आत्मा इहकार है और अग्नि ईकार है ॥ १ ॥
| अयं वावायमेव लोको हाउकारः स्तोभो रथन्तरे साम्नि प्रसिद्धः । 'इयं वै रथन्तरम्' इत्यस्मात्संबन्धसामान्याद्धाउकारस्तोभोऽयं लोक इत्येवमुपासीत । वायुर्हाइकारः । वामदेव्ये साम्नि हाइकारः प्रसिद्धः । वाय्वप्संबन्धश्च वामदेव्यस्य साम्नो यानि | यह लोक ही रथन्तर साममें प्रसिद्ध हाउकार स्तोभ है । 'यही रथन्तर है' इस सम्बन्धसामान्यसे हाउकार स्तोभ ही यह लोक है-इस प्रकार उपासना करे । वायु हाइकार है; वामदेव्य साममें हाइकार स्तोभ प्रसिद्ध है । वायु और जलका सम्बन्ध ही वामदेव्य सामका मूल |
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