छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 167, कुल 978 में से
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पञ्चम खण्ड
ऋतुविषयक पाँच प्रकारकी सामोपासना
ऋतुषु पञ्चविधँसामोपासीत वसन्तो हिंकारो ग्रीष्मः प्रस्तावो वर्षा उद्गीथः शरत्प्रतिहारो हेमन्तो निधनम् ॥ १ ॥
ऋतुओंमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे । वसन्त हिंकार है, ग्रीष्म प्रस्ताव है, वर्षा उद्गीथ है, शरत् प्रतिहार है और हेमन्त निधन है ॥ १ ॥
| संस्कृत-भाष्य | हिन्दी-अनुवाद |
|---|---|
| ऋतुषु पञ्चविधं सामोपासीत ।<br><br>ऋतुव्यवस्थाया यथोक्ताम्बुनिमित्तत्वादानन्तर्यम् । वसन्तो हिंकारः, प्राथम्यात् । ग्रीष्मः प्रस्तावः, यवादिसंग्रहः प्रस्तूयते हि प्रावृडर्थम् । वर्षा उद्गीथः, प्राधान्यात् । शरत्प्रतिहारः, रोगिणां मृतानां च प्रतिहरणात् । हेमन्तो निधनम्, निवाते निधनात्प्राणिनाम् ॥ १ ॥ | ऋतुओंमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे । ऋतुओंकी व्यवस्था पूर्वोक्त जलरूप निमित्तसे ही होती है, इस कारण यह ऋतुविषयक सामोपासना उसके बाद कही गयी है [ उनमें ] सबसे पहला होनेके कारण वसन्त हिंकार है । ग्रीष्म प्रस्ताव है, क्योंकि [ इसी समय ] वर्षाऋतुके लिये जौ आदि अन्नोंके संग्रहका प्रस्ताव किया जाता है । प्रधानताके कारण वर्षा उद्गीथ है । रोगी और मृत प्राणियोंका प्रतिहरण करनेके कारण शरद्ऋतु प्रतिहार (एक-जगहसे दूसरे स्थानपर ले जाना ) है तथा वायुके अभावमें प्राणियोंका निधन होनेके कारण हेमन्तऋतु निधन है ॥ १ ॥ |
छा० उ० ६—