भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 176
१७२छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय २

दुग्धेऽस्मै वाग्दोहं यो वाचो दोहोऽन्नवानन्नादो भवति य एतदेवं विद्वान्वाचि सप्तविधँसामोपास्ते ॥३॥

जो इसे इस प्रकार जाननेवाला पुरुष वाणीमें सप्तविध सामकी उपासना करता है उसे वाणी, जो कुछ वाणीका दोह (सार) है उसे देती है तथा वह प्रचुर अन्नसे सम्पन्न और उसका भोक्ता होता है ॥३॥

दुग्धेऽस्मा इत्याद्युक्तार्थम् ॥३॥'दुग्धेऽस्मै' इत्यादि श्रुतिका अर्थ पहले (१।३।७ में) कहा जा चुका है ॥ ३ ॥
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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि द्वितीयाध्याये
अष्टमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ८ ॥