भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 182, कुल 978 में से

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पृष्ठ 182
१७८छान्दोग्योपनिषद्[अध्याय २

| यत्ताः, द्योतनातिशयात्तत्काले। तस्मात्ते सत्तमा विशिष्टतमाः प्राजापत्यानां प्रजापत्यपत्यानामूद्गीथभाजिनो ह्येतस्य साम्नः ॥५॥ | लोग हैं, क्योंकि उस समय वे अत्यन्त प्रकाशशील होते हैं। इसीसे वे प्राजापत्योंमें—प्रजापतिके पुत्रोंमें सत्तम-विशिष्टतम होते हैं, क्योंकि वे इस सामकी उद्गीथभक्तिके भागी हैं ॥५॥ |


अथ यदूर्ध्वं मध्यन्दिनात्प्रागपराह्णात्स प्रतिहारस्तदस्य गर्भा अन्वायत्तास्तस्मात्ते प्रतिहृता नावपद्यन्ते प्रतिहारभाजिनो ह्येतस्य साम्नः ॥ ६ ॥

तथा आदित्यका जो रूप मध्याह्नके पश्चात् और अपराह्नके पूर्व होता है वह प्रतिहार है। उसके उस रूपके अनुगामी गर्भ हैं। इसीसे वे प्रतिहृत (ऊपरकी ओर आकृष्ट) किये जानेपर नीचे नहीं गिरते, क्योंकि वे इस सामकी प्रतिहारभक्तिके पात्र हैं ॥ ६ ॥

अथ यदूर्ध्वं मध्यन्दिनात्प्रागपराह्नाद्यद्रूपं सवितुः स प्रतिहारस्तदस्य गर्भा अन्वायत्ताः। अतस्ते सवितुः प्रतिहारभक्तिरूपेणोर्ध्वं प्रतिहृताः सन्तो नावपद्यन्ते नाधः पतन्ति तद्द्वारे सत्यपीत्यर्थः। यतः प्रतिहारभाजिनो ह्येतस्य साम्नो गर्भाः ॥ ६ ॥तथा आदित्यका जो रूप मध्याह्नके पश्चात् और अपराह्नसे पूर्व होता है वह प्रतिहार है। उसके उस रूपके अनुगामी गर्भ हैं। अतः वे सूर्यकी प्रतिहारभक्तिरूपसे ऊपरकी ओर प्रतिहृत (आकृष्ट) होनेके कारण, पतनके द्वारपर रहते हुए भी, अवपन्न नहीं होते—नीचे नहीं गिरते, क्योंकि गर्भ इस सामकी प्रतिहारभक्तिके भागी हैं ॥ ६ ॥