भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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तृतीय खण्ड

१६१. पाञ्चालोंकी सभामें श्वेतकेतु .... ... ४७२ १६२. प्रवाहणके प्रश्न .... .... ४७३ १६३. प्रवाहणसे पराभूत श्वेतकेतुका अपने पिताके पास आना .... ४७५ १६४. पिता-पुत्रका प्रवाहणके पास आना .... .... ४७७ १६५. प्रवाहणका वरप्रदान ... .... ४७९

चतुर्थ खण्ड

१६६ पञ्चम प्रश्नका उत्तर .... .... ४८१ १६७. लोकरूपा अग्निविद्या .... .... ४८३

पञ्चम खण्ड

१६८. पर्जन्यरूपा अग्निविद्या .... • .... ४८७

षष्ठ खण्ड

१६९. पृथिवीरूपा अग्निविद्या .... ... ४८९

सप्तम खण्ड

१७०. पुरुषरूपा अग्निविद्या ... ... ४९१

अष्टम खण्ड

१७१. स्त्रीरूपा अग्निविद्या ... .... ४९३

नवम् खण्ड

१७२. पञ्चम आहुतिमें पुरुषत्वको प्राप्त हुए आपकी गति ... ४९६

दशम खण्ड

१७३. प्रथम प्रश्नका उत्तर ... .... ५०० १७४. तृतीय प्रश्नका उत्तर ... .... ५०९ ( देवयान और धूमयानका व्यावर्तनस्थान ) १७५. द्वितीय प्रश्नका उत्तर .... .... ५१४ ( पुनरावर्तनका क्रम ) १७६. अनुशयी जीवोंकी कर्मानुरूप गति .... .... ५२९ १७७. चतुर्थ प्रश्नका उत्तर ... .... ५३१ ( अशास्त्रीय प्रवृत्तिवालोंकी गति ) १७८. पाँच पतित .... .... ५३४ १७९. पञ्चाग्निविद्याका महत्त्व .... ... ५३५