भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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एकादश खण्ड

१८०. औपमन्यव आदिका आत्ममीमांसाविषयक प्रस्ताव .... ५३६
१८१. औपमन्यवादिका उद्दालकके पास आना ... .... ५३८
१८२. उद्दालकका औपमन्यवादिके सहित अश्वपतिके पास आना ... .... ५३९
१८३. अश्वपतिद्वारा मुनियोंका स्वागत ... .... ५४०
१८४. अश्वपतिके प्रति मुनियोंकी प्रार्थना ... .... ५४२
१८५. राजाके प्रति मुनियोंकी उपसत्ति .... .... ५४३

द्वादश खण्ड

१८६. अश्वपति और औपमन्यवका संवाद ... ... ५४५

त्रयोदश खण्ड

१८७. अश्वपति और सत्ययज्ञका संवाद ... .... ५४९

चतुर्दश खण्ड

१८८. अश्वपति और इन्द्रद्युम्नका संवाद ... .... ५५१

पञ्चदश खण्ड

१८९. अश्वपति और जनका संवाद .... ... ५५३

षोडश खण्ड

१९०. अश्वपति और बुडिलका संवाद ... — ५५५

सप्तदश खण्ड

१९१. अश्वपति और उद्दालकका संवाद ... ... ५५७

अष्टादश खण्ड

१९२. अश्वपतिका उपदेश—वैश्वानरकी समस्तोपासनाका फल .... ५५९
१९३. वैश्वानरका साङ्गोपाङ्ग स्वरूप ... ... ५६१

एकोनविंश खण्ड

१९४. भोजनकी अग्निहोत्रत्वसिद्धिके लिये ‘प्राणाय स्वाहा’ इस पहली आहुतिका वर्णन .... ... ५६३

विंश खण्ड

१९५. ‘व्यानाय स्वाहा’ इस दूसरी आहुतिका वर्णन ... .... ५६५

एकविंश खण्ड

१९६. ‘अपानाय स्वाहा’ इस तीसरी आहुतिका वर्णन .... ... ५६६