भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 22, कुल 978 में से

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( १८ )

द्वाविंश खण्ड

१९७. 'समानाय स्वाहा' इस चौथी आहुतिका वर्णन ... ५६७

त्रयोविंश खण्ड

१९८. 'उदानाय स्वाहा' इस पाँचवीं आहुतिका वर्णन ... ... ५६८

चतुर्विंश खण्ड

१९९. अविद्वान्‌के हवनका स्वरूप ... ... ५६९
२००. विद्वान्‌के हवनका फल .... .... ५६९

षष्ठ अध्याय

प्रथम खण्ड

२०१. आरुणिका अपने पुत्र श्वेतकेतुके प्रति उपदेश ... .... ५७३

द्वितीय खण्ड

२०२. अन्य पक्षके खण्डनपूर्वक जगत्‌की सद्‌रूपताका समर्थन ... ५८२

तृतीय खण्ड

२०३. सृष्टिका क्रम .... .... ... ६०४

चतुर्थ खण्ड

२०४. एकके ज्ञानसे सबका ज्ञान ... ... ६१३.

पञ्चम खण्ड

२०५. अन्न आदिके त्रिविध परिणाम ... .... ६२३

षष्ठ खण्ड

२०६. अन्न आदिका सूक्ष्म भाग ही मन आदि होता है ... .. ६२९

सप्तम खण्ड

२०८. षोडशकलाविशिष्ट पुरुषका उपदेश ... .... ६३२

अष्टम खण्ड

२०७. सुषुप्तिकालमें जीवकी स्थितिका उपदेश ... .... ६४०

नवम खण्ड

२०९. सुषुप्तिमें 'सत्' की प्राप्तिका ज्ञान न होनेमें मधुमक्खियोंका दृष्टान्त ... .... .... ६६३

दशम खण्ड

२१०. नदीके दृष्टान्तद्वारा उपदेश .... ... ६६८

एकादश खण्ड

२११. वृक्षके दृष्टान्तद्वारा उपदेश .... .... ६७१

द्वादश खण्ड

२१२. न्यग्रोधफलके दृष्टान्तद्वारा उपदेश ... ... ६७६

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