भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 324, कुल 978 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 324
३२०छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय ३

अरिष्टं कोशं प्रपद्येऽमुनाऽमुनाऽमुना प्राणं प्रपद्येऽमुनाऽमुनाऽमुना भूः प्रपद्येऽमुनाऽमुनाऽमुना भुवः प्रपद्येऽमुनाऽमुनाऽमुना स्वः प्रपद्येऽमुनाऽमुनाऽमुना ॥ ३ ॥

मैं अमुक अमुक अमुकके सहित अविनाशी कोशकी शरण हूँ; अमुक अमुक अमुकके सहित प्राणकी शरण हूँ; अमुक अमुक अमुकके सहित भूःकी शरण हूँ; अमुक-अमुक अमुकके सहित भुवःकी शरण हूँ; अमुक अमुक अमुकके सहित स्वःकी शरण हूँ* ॥ ३ ॥

संस्कृत-भाष्यहिन्दी-अनुवाद
अरिष्टमविनाशिनं कोशं यथोक्तं प्रपद्ये प्रपन्नोऽस्मि पुत्रायुषे । अमुनाऽमुनाऽमुनेति त्रिर्नाम गृह्णाति पुत्रस्य । तथा प्राणं प्रपद्येऽमुनाऽमुनाऽमुना, भूःप्रपद्येऽमुनाऽमुनाऽमुना, भुवःप्रपद्येऽमुनाऽमुनाऽमुना, स्वः प्रपद्येऽमुनाऽमुनाऽमुना, सर्वत्र प्रपद्य इति त्रिर्नाम गृह्णाति पुनः पुनः ॥ ३ ॥पुत्रकी दीर्घायुके लिये मैं पूर्वोक्त अरिष्ट—अविनाशी कोशकी शरण हूँ। 'अमुना अमुना अमुना' इसका यह तात्पर्य है कि तीन-तीन बार अपने पुत्रका नाम लेता है। तथा अमुक अमुक अमुकके सहित प्राणकी शरण हूँ; अमुक अमुक अमुकके सहित भूःकी शरण हूँ; अमुक अमुक अमुकके सहित भुवःकी शरण हूँ और अमुक अमुक अमुकके सहित स्वःकी शरण हूँ। सर्वत्र 'अमुक अमुक अमुकके सहित शरण हूँ' ऐसा कहकर बारम्बार तीन-तीन बार पुत्रका नाम लेता है ॥ ३ ॥

स यदवोचं प्राणं प्रपद्य इति प्राणो वा इदꣳसर्वं भूतं यदिदं किञ्च तमेव तत्प्रापत्सि ॥४॥ अथ यदवोचं


* इसमें जहाँ-जहाँ 'अमुक' शब्द आया है वहाँ अपने पुत्रके नामका उच्चारण करना चाहिये।