भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 366, कुल 978 में से

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पृष्ठ 366
३६२छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय ४

किया। तब वह सेवक यह समझकर कि मैंने उसे पहचान लिया है, लौट आया ॥ ८ ॥

| क्षत्तानन्विष्य तं विजने देशेऽधस्ताच्छकटस्य गन्त्र्याः पामां खर्जूं कषमाणं कण्डूयमानं दृष्ट्वा 'अयं नूनं सयुग्वा रैक्वः' इत्युपसमीप उपविवेश विनयेनोपविष्टवान् । तं च रैक्कं हाम्युवादोक्तवान्—त्वमसि हे भगवो भगवन् सयुग्वा रैक्व इति । एवं पृष्टोऽहमस्मि ह्यरा ३ अर इति हानादर एव प्रतिजज्ञेऽभ्युपगतवान् । स तं विज्ञायाविदं विज्ञातवानस्मीति प्रत्येयाय प्रत्यागत इत्यर्थः ॥ ८ ॥ | वह सेवक निर्जन स्थानमें खोज करनेपर उसे एक गाड़ीके नीचे खाज खुजलाते देखकर 'निश्चय यही गाड़ीवाला रैक है' ऐसा निश्चय कर उसके समीप नम्रतापूर्वक बैठ गया; तथा उस रैक्वसे कहा—'हे भगवन् ! गाड़ीवाले रैक्व आप ही हैं ?' इस तरह पूछे जानेपर 'अरे ! हाँ, मैं ही हूँ' इस प्रकार 'अरे' कहकर उसने अनादर ही प्रकट किया । तब सेवक उसे जानकर—यह समझकर कि 'अब मैंने रैक्वको जान लिया—पहचान लिया है' लौट आया ॥ ८ ॥ |

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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि तृतीयाध्याये
प्रथमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १ ॥