छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 441, कुल 978 में से
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खण्ड १७ ] शाङ्करभाष्यार्थ ४३७
और यदि यजुःश्रुतियोंके कारण क्षत हो तो 'भुवः स्वाहा' ऐसा कहकर दक्षिणाग्निमें हवन करे। इस प्रकार वह यजुओंके रससे यजुओंके वीर्यद्वारा यज्ञके यजुःसम्बन्धी क्षतकी पूर्ति करता है ॥ ५ ॥
अथ यदि सामतो रिष्येत्स्वः स्वाहेत्याहवनीये जुहुयात्साम्नामेव तद्रसेन साम्नां वीर्येण साम्नां यज्ञस्य विरिष्टंसंदधाति ॥ ६ ॥
और यदि सामश्रुतियोंके कारण क्षत हो तो 'स्वः स्वाहा' ऐसा कहकर आहवनीयाग्निमें हवन करे। इस प्रकार वह सामके रससे सामके वीर्य द्वारा यज्ञके सामसम्बन्धी क्षतकी पूर्ति करता है ॥ ६ ॥
| भाष्यम् | भाष्यार्थ |
|---|---|
| अथ यदि यजुष्टो यजुर्निमित्तं रिष्येद्भूवः स्वाहेति दक्षिणाग्नौ जुहुयात्। तथा सामनिमित्ते रेषे स्वः स्वाहेत्याहवनीये जुहुयात् । तथा पूर्ववद्यज्ञं संदधाति । ब्रह्मनिमित्ते तु रेषे त्रिष्वग्निषु तिसृभिर्व्याहृतिभिर्जुहुयात् । त्रय्या हि विद्यायाः स रेषः । "अथ केन | और यदि यजुर्निमित्तक क्षत हो तो 'भुवः स्वाहा' ऐसा कहकर दक्षिणाग्निमें हवन करे, तथा सामसम्बन्धी क्षत होनेपर 'स्वः स्वाहा' ऐसा कहकर आहवनीयाग्निमें हवन करे। इस प्रकार वह पूर्ववत् ( ऋक्सम्बन्धी क्षतमें किये हुएके अनुसार ) यज्ञक्षतकी पूर्ति कर लेता है। [ ये सब प्रायश्चित्त होता, उद्गाता और अध्वर्युद्वारा होनेवाले क्षतोंकी पूर्तिके लिये हैं । ] ब्रह्माके कारण यज्ञक्षत होनेपर तो तीनों अग्नियोंमें तीनों व्याहृतियोंद्वारा हवन करे; क्योंकि [उसके द्वारा होनेवाला] वह यज्ञक्षत तो त्रयीविद्याका ही क्षत |