भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 683, कुल 978 में से

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पृष्ठ 683

खण्ड १२ ] शाङ्करभाष्यार्थ ३७९


स य एषोऽणिमैतदात्म्यमिदꣳसर्वं तत्सत्यꣳस आत्मा तत्त्वमसि श्वेतकेतो इति भूय एव मा भगवान् विज्ञापयत्विति तथा सोम्येति होवाच ॥ ३ ॥

वह जो यह अणिमा है एतद्रूप ही यह सब है। वह सत्य है वह आत्मा है और हे श्वेतकेतो ! वही तू है। [ आरुणिके इस प्रकार कहनेपर श्वेतकेतु बोला— ] 'भगवन् ! मुझे फिर समझाइये ।' [ तब आरुणिने ] 'अच्छा, सोम्य !' ऐसा कहा ॥ ३ ॥

| स य इत्याद्युक्तार्थम् । यदि तत्सज्जगतो मूलं कस्मान्नोपलभ्यत इत्येतद्दृष्टान्तेन मा भगवान्भूय एव विज्ञापयत्विति । तथा सोम्येति होवाच पिता ॥ ३ ॥ | 'स यः' इत्यादि श्रुतिका अर्थ पहले कहा जा चुका है। 'यदि वह सत् जगत्का कारण है तो उपलब्ध क्यों नहीं होता ? हे भगवन् ! इस बातको आप दृष्टान्तद्वारा मुझे फिर समझाइये' ऐसा [श्वेतकेतुने कहा] । तब पिताने 'सोम्य ! अच्छा' ऐसा उत्तर दिया ॥ ३ ॥ |

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इतिच्छान्दोग्योपनिषदि षष्ठाध्याये द्वादशखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ १२ ॥