भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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पृष्ठ 78
७४छान्दोग्योपनिषद्[अध्याय १

करे—जिस सामके द्वारा उद्गाताको स्तुति करना हो उस सामका [उसकी उत्पत्ति आदिके क्रमसे] चिन्तन करे ॥ ८ ॥

अथ खल्विदानीमाशीः समृद्धिराशिषः कामस्य समृद्धैर्यथा भवेत्तदुच्यत इति वाक्यशेषः। उपसरणान्युपसर्तव्यान्युपगन्तव्यानि ध्येयानीत्यर्थः; कथम्?<br><br>इत्युपासीत—एवमुपासीत;<br><br>तद्यथा—येन साम्ना येन सामविशेषेण स्तोष्यन्स्तुतिं करिष्यन् स्याद्भवेदुद्गाता तत्सामोपधावेदुपसरेच्चिन्तयेदुत्पत्त्यादिभिः॥८॥इसके अनन्तर अब निश्चय ही आशीःसमृद्धि—जिस प्रकार आशीः अर्थात् कामनाकी समृद्धि होगी वह बतलायी जानी है, इस प्रकार इस वाक्यकी पूर्ति करनी चाहिये। उपसरण—उपसर्तव्य-उपगन्तव्य अर्थात् ध्येय--इनकी किस प्रकार उपासना करनी चाहिये? इनको उपासना इस प्रकार करे; यथा—जिस सामसे अर्थात् जिस सामविशेषसे उद्गाताको स्तुति करनी हो उस सामका उसकी उत्पत्ति आदिके क्रमसे उपधावन—उपसरण अर्थात् चिन्तन करे ॥ ८ ॥

यस्यामृचि तामृचं यदार्षेयं तमृषिं यां देवतामभिष्टोष्यन्स्यात्तां देवतामुपधावेत् ॥ ९ ॥

[वह साम] जिस ऋचामें [प्रतिष्ठित हो] उस ऋचाका, जिस ऋषिवाला हो उस ऋषिका तथा जिस देवताकी स्तुति करनेवाला हो उस देवताका चिन्तन करे ॥ ९ ॥

यस्यामृचि तत्साम तां चर्चमुपधावेद्देवतादिभिः। यदार्षेयं साम तं चर्षिम्। यां देवतामभिष्टोष्यन्स्यात्तां देवतामुपधावेत् ॥ ९ ॥वह साम जिस ऋचामें अधिष्ठित हो उस ऋचाका उसके देवतादिके सहित चिन्तन करे। तथा वह साम जिस ऋषिवाला हो उस ऋषिका और जिस देवताकी स्तुति करनेवाला हो उस देवताका भी चिन्तन करे ॥९॥