चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)
Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation
महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 347, कुल 616 में से
संदर्भ में पढ़ेंअ० ४ ] चिकित्सितस्थानम् ३३३ लङ्घनं रक्तपित्ताचौ तर्पणं वा प्रयोजयेत् ॥ ३० ॥ प्रायः करके पुरुषों मे आम-दोष के कारण से ही उत्क्लेशित रक्त-पित्त वृद्धि को प्राप्त होता है, इसलिये प्रथम लङ्घन कराना चाहिये । मार्ग, दोषों के अनुबन्ध और निदान को देखकर रक्त-पित्त में लङ्घन अथवा तर्पण का प्रयोग करना चाहिये । [ अर्थात् ऊर्ध्वमार्ग, साम पित्त, कफ दोष, स्निग्ध और उष्ण निदान हो तो लङ्घन करावे । अधोमार्ग, वायु, दोष और रूक्ष और उष्ण निदान हो तो संतर्पण (भोजन जैसे—यवागू या लाजासक्तु) देवे] ॥२९-३०॥ ह्रीबेरचन्दनोशीरमुस्तपर्पटकैः शृतम् । केवलं शृतशीतं वा दद्यात्तोयं पिपासवे ॥ ३१ ॥ ऊर्ध्वगे तर्पणं पूर्वं पेया पूर्वमधोगते । कालसात्म्यानुबन्धज्ञो दद्यात्प्रकृतिकल्पवित् ॥ ३२ ॥ रक्तपित्त मे प्यास लगने पर, ह्रीबेर (गन्धवाला ), लाल चन्दन, खस, नागरमोथा, पित्तपापडा इनका शृत कषाय (क्वाथ) अथवा पानी को पका कर ठण्डा करके (औषध से द्वेष करने वाले को) देना चाहिये। काल, सात्म्य, अनुबन्ध (दोषों के), प्रकृति (गुरु लाघव आदि कल्पना) के सस्कार का समझने वाले वैद्य को चाहिये कि ऊर्ध्वगामी रक्तपित्त मे प्रथम लाजा-सत्तू से संतर्पण कराये और अधोगामी रक्तपित्त मे पेया का पान करावे । यदि रोगी लङ्घन के योग्य हो तो प्रथम लङ्घन करावे । पीछे से तर्पण या पेया दे । अयोग्य हो तो प्रथम से ही तर्पण या पेया का प्रयोग करे ॥ ३१-३२ ॥ जलं खर्जूरमृद्वीकामधूकैः सपरूषकैः । शृतशीतं प्रयोक्तव्यं तर्पणार्थं सशर्करम् ॥ ३३ ॥ तर्पणं सघृतक्षौद्रं लाजचूर्णैः प्रयोजयेत् । ऊर्ध्वगं रक्तपित्तं तत् पीतं काले व्यपोहति ॥ ३४ ॥ मन्दाग्नेरम्लसात्म्याय तत्साम्लमपि कल्पयेत् । दाडिमामलकैर्विद्वानम्लार्थं चानुदापयेत् ॥ ३५ ॥ रक्तपित्त मे तर्पण—(१) पिण्डखजूर, मुनक्का, महुवे का फूल, फालसा इनका २ पल लेकर, ३२ तोला पानी मे पका कर पञ्चमांश रहने पर छान कर शर्करा मिला कर तर्पण (प्यास बुझाने) के लिये देवे । अथवा षडगपानीय विधि से पकावे । (२) लाजा (खीलो) के चूर्ण को घी और शहद के साथ देवे । इस तर्पण को उचित काल मे देने से ऊर्ध्वगामी रक्तपित्त मिटता है । [ इसको खर्जूरादि क्वाथ मे घोल कर भी दे सकते हैं । ]