चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)
Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation
महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)
पृष्ठ 394, कुल 616 में से
संदर्भ में पढ़ेंअ० ६ ] चिकित्सितस्थानम् ३७६ ( ३ ) जो प्रमेह रोगी सशोधन के योग्य न हो उसके लिये सशमनी चिकित्सा करे । उसको प्रमेह की शान्ति के लिये—मन्थ, कषाय, जौ, चूर्ण, अवलेह और लघु भक्ष्य पदार्थों का सेवन करावे । ( ४ ) विष्किर, प्रतुद पक्षियो का तथा जागल पशु-पक्षियों के मन-मोहक सुस्वादु मास-रसो के साथ, रूक्ष यवान्न, वाट्य ( जौ का मण्ड ), पुराना मद्य, सत्तू, अपूप ( वडे ) मूग आदि का यूष, तिक्त शाक, पुराने शालियो का भात, दन्ती तैल, इङ्गुदी ( हिंगोट ) का तैल, अलसी तथा सरसो के तैल के साथ साठी आदि तृणधान्यो को दे । प्रमेह रोगी का खास कर जौ का भोजन करावे । कफ-प्रमेही को मधु के साथ जौ के नाना प्रकार के पदार्थ खाने क लिये दे । ( ५ ) प्रमेह का रोगी त्रिफला के काथ म जौ का डालकर रात भर रख दे । पीछे स इनको सत्तू बनाकर जल मे आलोड़ित करके मधु मिला कर तर्पण बनावे । इन तर्पणो का सीधु के साथ मिलाकर प्रति दिन पान करे ॥१७–२२॥ ये श्लेष्ममेहे विहिताः कषायास्तैर्भाविताना च पृथग्यवानाम् । सक्तूनपूपान्सगुडान्सधानान्भक्ष्यांस्तथाऽन्यान्यविधान्श्चखादेत् २३ खराश्वगोहस्रपृषदूभृताना' तथा यवाना विविधाश्चभक्ष्याः । देयास्तथा वेणुयवा यवाना कल्पेन गोधूममयाश्च भक्ष्याः ॥२४॥ सशोधनोल्लेखनलंधनानि काले प्रयुक्तानि कफप्रमेहान् । जयन्ति पित्तप्रभवान्विरेकाः संतर्पणः सशमनो विधिश्च॥ २५॥ दार्वा सुराह्वां त्रिफला समुस्ता कषायमुत्क्वाथ्य पिबेत्प्रमेही । क्षौद्रेण युक्तामथवा हरिद्रा पिबेद्रसेनामलकीफलानाम् ॥ २६ ॥ ( ६ ) कफप्रमेह मे जो कषाय कहे है, उन कषायो से पृथग् २ रूप मे जौ को भावित करके सत्तू, अपूप, धाना ( भुने जौ ) और अन्य भक्ष्य पदार्थों का बनाकर गुड के साथ खावे । ( ७ ) गदहा, घोडा, गाय, हस, पृषत् ( हरिण ) इनके द्वारा खाये हुए जौ जो उनके मल मे बाहर आवे उनसे नाना प्रकार के भक्ष्य बना कर देवे । इसी प्रकार वेणुयव ( बास के जो, वशफल ) और गेहूँ के बने भक्ष्य पदार्थ सेवन करने के लिये देवे । ( ८ ) उचित समय मे दिये गये सशोधन, उल्लेखन (वमन), लघन कफप्रमेह को नष्ट करते है, सतर्पण, सशमन और विरेचन पित्तजन्य प्रमेहो को जीतते है । १ 'खराश्वगोधेणुकसभृताना' इति च पाठः ।