भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

पृष्ठ 395, कुल 616 में से

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पृष्ठ 395

३८० चरकसंहिता [ अ० ६ (६) दारु हरिद्रा, हरड, बहेडा, आवला और मोथा इनके क्वाथ पीवे, अथवा हल्दी के चूर्ण को मधु के साथ मिलाकर आवले के रस के साथ पीवे ॥२३-२६॥ हरीतकीकट्फलमुस्तलोध्र पाठाविडङ्गाजु॑नधन्वनाश्च । उभे हरिद्रे तगर विडङ्ग कदम्बशालार्जुनदीप्यकाश्च ॥ २७ ॥ दार्वी विडङ्ग खदिरो धवश्च सुराह्वकुष्ठागुरुचन्दनानि । दार्व्यग्निमन्थौ त्रिफला सपाठा पाठा च मूर्वा च तथा श्वदंष्ट्रा ॥२८॥ यवान्युशीरान्यभया गुडूची चव्याभयाचित्रकसप्तपर्णाः । पादैः कषायाः कफमेहिना ते दशोपदिष्टा मधुसंप्रयुक्ताः ॥ २६ ॥ कफप्रमेह के दस योग—(१) हरड, कायफल, मोथा और लोध, (२) पाठा, वायविडंग, अर्जुन, धन्वन (धावन की छाल), (३) हल्दी, दारुहल्दी, तगर, वायविडग, (४) कदम्ब, शाल, अर्जुन, अजवायन, (५) दारुहल्दी, वायविडंग खैर और धव की छाल, (६) देवदारु, कूठ, अगरु और लालचन्दन, (७) दारुहल्दी, अग्निमन्थ, त्रिफला और पाठा, (८) पाठा, मूवा और गाखरू, (६) अजवायन, खस और हरड़ तथा गिलोय, (१०) चविका, हरड, चीतामूल, सतवन की छाल, ये दस कषाय श्लोका के चतुर्थ भागो मे कहे गये है । इनका मधु के साथ मिलाकर कफ-प्रमेह मे बरते ॥ २७-२६ ॥ उशीरलोध्राञ्जनचन्दनानामुशीरमुस्तामलकाभयानाम् । पटोलनिम्बामलकामृताना मुस्ताभयापद्मकवृक्षकाणाम् ॥ ३० ॥ लोध्राम्बुकालीय कधातकीना निम्बार्जुनाम्रातनिशोत्पलानाम् । शिरीषसर्जार्जुनकेशराणि प्रियङ्गुपद्मोत्पर्लाकशुकानाम् ॥ ३१ ॥ अश्वत्थपाठासनवेतसाना कटङ्कटेड्युत्पलमुस्तकानाम् । पैत्तेषु मेहेषु दशैव दृष्टाः पादैः कषायाः मधुसंप्रयुक्ताः ॥ ३२ ॥ पैत्तिक प्रमेह मे दस प्रयोग—(१) खस, लाध, अंजन (रसांजन) लाल चन्दन, (२) खस, मोथा, आवला ओर हरड, (३) परवल, नीम की छाल, आवला, गिलाय, (४) मोथा, हरड, पद्माख और इन्द्रजो (कूडे की छाल), (५) लोध, गन्धबाला, कालीयक (पीतकाष्ठ चन्दन) धान के फूल, (६) नीम की छाल, अर्जुन की छाल, अम्बाडा, हल्दी, नीला कमल, (७) सिरस की छाल, सर्जत्वक्, अर्जुन की छाल, नाग केसर, (८) फूलप्रियगु, श्वेतकमल, नीलोत्पल, ढाक के फूल, (६) अश्वत्थ, पाठा, असन (पीतशाल) की छाल, वेतस की छाल, (१०) कटकटेरी, (दारुहल्दी), नीलोत्पल, मोथा, ये दस