भारतकोश
चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

चरक संहिता (द्वितीय भाग: चिकित्सा, कल्प व सिद्धि स्थान)

Charaka Samhita Part 2 with Hindi Translation

महर्षि चरक व दृढ़बल द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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४८८ चरकसंहिता [ अ० ११ (१) सैन्धवादि चूर्ण—सैन्धव एक पल, सोंठ दो पल, सचल नमक दो पल, वृक्षाम्ल (समगदाना या पकी इमली) चार पल, अनारदाना चार पल, अर्जक (तुलसी) पत्र चार पल, मरिच एक पल, अजाजी (जीरा) १ पल, धनिया दो पल, शर्करा बारह पल इन सबका चूर्ण करले। फिर अग्नि के अनु- सार इसकी मात्रा खान-पान मे बरते। यह चूर्ण रोचक, अग्निदीपक, बलकारक पार्श्वशूल, कास ओर श्वास रोगो का नाशक है ॥ ८५ ८७ ॥ एका षोडशिका धान्याद् द्वे द्वेऽजाज्यजमोदयोः । ताभ्या दाडिमवृक्षाम्लाद् द्विर्द्विः सौवर्चलात्पलम् ॥ ८८ ॥ शुण्ठ्याः कर्षं दधित्थस्य मध्यात्पञ्च पलानि च । तच्चूर्णं षोडशपले शर्कराया विमिश्रयेत् ॥ ८९ ॥ मन्दानले शकृद्भेदे यक्ष्मिणामग्निवर्धनः । षाडवोऽयं प्रदेयः स्यादन्नपानेषु पूर्ववत् ॥ ९० ॥ इति षाडवः । (२) षाडव—धनिया, एक षोडशिका (पल¹), अजाजी (जीरा) दो पल, अजवायन दो पल, अनारदाना चार पल, वृक्षाम्ल चार पल, सौवर्चल (सचल नमक) एक पल, सोठ एक कर्ष, कपित्थ (कैथ) की मज्जा पाच पल, इन सब को चूर्ण करके सोलह पल शर्करा मे मिलावे। यह षाडव अग्नि- वर्धक है, मन्दाग्नि और अतिसार मे पूर्व की भाति मात्रानुसार देवे। यह रोचक, दीपक, बलवर्धक और कासनाशक है ॥८८-६०॥ पिबेन्नागबलामूलमर्धकर्षविवर्धनम् । पलं क्षीरयुतं मास क्षीरवृत्तिरनन्नभुक् ॥ ९१ ॥ एष प्रयोगः पुष्ट्यायुर्बलारोग्यकरः परः । मण्डूकपर्ण्याः कल्पोऽयं शुण्ठीमधुकयोस्तथा ॥ ९२ ॥ नागबला मूल की छाल का चूर्ण आधा कर्ष लेकर प्रतिदिन आधा कर्ष बढाते हुए एक पल की मात्रा तक बढा कर सेवन करावे। प्रथम दिन आधा कर्ष, दूसरे दिन एक कर्ष, तीसरे दिन डेढ कर्ष, चौथे दिन दो कर्ष इसी प्रकार से आठवे दिन चार कर्ष या एक पल खावे। चूर्ण को दूध के साथ सेवन करावे। आठ दिन के पीछे एक पल, मात्रा मे चूर्ण खावे। एक मास तक अन्न न खाकर केवल दूध ही पीना चाहिये, यह प्रयोग श्रेष्ठ है। यह योग पुष्टि, आयु, बल और आरोग्य को देता है। इसी प्रकार से मण्डूकपर्णी, सोठ और मुलहठी की भी नागबला चूर्ण के समान प्रयोगविधि है ॥९१-९२॥ १ पल मुष्टि. प्रकुञ्चोऽथ चतुर्थिका बिल्व षोडशिका चाम्रमिति (च०क०१२)