छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतीन शृंगारपुर के बाहर का शिवमन्दिर प्रातःकाल ही शम्भूराजा के संगी-साथियों से खचाखच भर गया था। आसपास में घने बादल छाये थे। नयी ऊर्जा और नये धैर्य से मार्ग पर निकलना था। शम्भूराजा ने महादेव का अभिषेक आरम्भ किया था। अनेक शास्त्री पंडित बिना कुर्ता पहने शिवालय के गर्भगृह में उपस्थित थे। एक घंटे में अभिषेक पूर्ण हो गया। काले बादल भी छँट गये थे और सफेद बादल बाहर आ गये थे। दीवान सरदार विट्ठलराव मन्दिर से बाहर निकले। अब गर्भगृह में केवल शम्भूराजा और कवि कलश ही खड़े थे। कवि कलश से नहीं रहा गया, उन्होंने कहा, "राजन् आगरा-मथुरा से लेकर आजतक हम आपकी छाया बने रहे हैं। यह मानकर कि आप ही हमारे घर बार और वतन हैं, आपके पीछे-पीछे घूमते रहे हैं।" शम्भूराजा कवि कलश की ओर देखकर मन्द मन्द मुस्कराये। उन्होंने कहा, "मुझे अकेले ही जाने दीजिए। यदि आप हमारे साथ आये तो जानते हैं कि ये जहरीली जुबान वाले राज्याधिकारी चिल्ला-चिल्लाकर क्या कहेंगे? दुष्ट दगाबाज कवि कलश ने ही सारी गड़बड़ी की है। पागल शम्भू को तन्त्र मन्त्र करके मुगलों के झुंड में खींच ले गया।" कलश खिन्नता से हँसे। शम्भूराजा की जुदाई का दुख उनके चेहरे से हट नहीं रहा था! उनका धैर्य बँधाते हुए शम्भूराजा ने कहा, "यदि आप यहाँ रहेंगे तो हमारे जाने के बाद भी शत्रुओं को आपकी दहशत बनी रहेगी। वहाँ मुझ पर कोई विपत्ति आयी तो आपको बुला तो सकेंगे।" "राजन् आपकी जो आज्ञा।" कवि कलश ने कहा, "किन्तु युवराज आपके जाने के बाद भी धूर्त प्रवृत्ति शान्त नहीं रहेगी। महाराज से सीधे शिकायत करके हमें भी निष्कासित करवाने का आग्रह करेंगे। ये लोग कैसी भी शिकायत करते हैं। कहते हैं, हम भैंसे की खाल पर बैठकर साधना करते हैं।" "ऐसे आरोप केवल अधिक चालाक बनने वाले लोग ही कर सकते हैं। भैंस की खाल कितनी मोटी होती है? उसे काटने और बिछाने के लिए कितने लोग लगते हैं? इसका ज्ञान क्या इन महानुभावों को है?" कविराज को धीरज देते हुए शम्भूराजा ने कहा, "आपकी बुद्धिमत्ता और मेरे ऊपर आपकी निष्ठा महाराज को भली-भाँति मालूम है। जैसा हमारे शत्रु कहते हैं वैसे यदि आप होते और पिताजी 104 :: सम्भाजी