छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाफ दिखने लगा। घाट पर पंछियों का कलरव और भावुक भक्तों का शोर बढ़ने लगा। नदी में अनेक स्थानों पर गहरी खाई बन गयी थी। वैसे नदी में कमर के बराबर ही पानी था। अनेक भक्त इस पार से उस पार तक आ जा रहे थे। खेलोजी उनकी ओर बड़ी स्नेहभरी दृष्टि से देख रहे थे। शम्भुराजा ने भी वहीं पर स्नान किया। नदी के उस पार के खेत से अचानक कुछ आवाज आयी। एक हरी झंडी कुछ संकेत करके अदृश्य हो गयी। इस दृश्य से खेलोजी चकित हो उठे। किन्तु वह शत्रु का क्षेत्र था, इसलिए खेलोजी ने अधिक ध्यान नहीं दिया। शम्भुराजा ने शीघ्रता से वस्त्र पहने। सिर पर जरीदार रेशमी टोप रखते ही उनका रूप निखर आया। किसी को भी बन्दी बना लेने वाली उनकी आँखें, जादू का प्रभाव डालने वाला गोरा रंग, शिवाजी महाराज जैसी ही गरुड़ सी नाक। उन्हें देखते हुए खेलोजी को लगा कि स्वयं शिवाजी महाराज ही आ गये हैं। इसी धुन में वे युवराज को देखते रह गये। इसी समय शम्भुराजा ने अपने हैवती घोड़े की लगाम खींचकर उसे संकेत किया। घोड़ा उत्साह से नाच उठा और हिनहिनाया। जिस तरह बाघ अपने अगले पैरों को उठाकर झपट्टा लगाता है, उसी तरह घोड़ा अपने अगले पैरों को उठाकर मस्ती से झूम गया। खेलोजी कुछ क्षण के लिए मुग्ध हो गये। युवराज ने नदी के किनारे से परली की ओर घोड़ा ले जाने के बदले सीधे नदी के पानी में उतार दिया। संभाजी राजा के पीछे उनके समर्थक सैनिकों ने भी अपने घोड़ों को नदी में उतार दिया। सूर्योदय के पूर्व ही नदी के उस पार मुगल सैनिकों की एक कतार बहुत पहले से ही आकर खड़ी हो गयी थी। हरे रंग के कुर्ते सलवार पहने, लम्बी लम्बी दाढ़ी-मूँछ वाले मुगल घुड़सवार शम्भुराजा को मुग्ध भाव से देख रहे थे। युवराज के नदी में उतरते ही मुगल घुड़सवारों ने अपने हरे झंडे और अपनी तलवारों को हवा में लहराया। 'अल्लाहो अकबर' और 'जय जय शम्भुमहाराज' के नारे लगाये। यह अप्रिय और अभद्र दृश्य देखकर खेलोजी का कलेजा काँप उठा। वे भी जो वस्त्र पहने थे उनके साथ ही नदी में छलाँग लगा दी। हाथ में नंगी तलवार लेकर शम्भुराजा का पीछा करते हुए वे चिल्लाये—"छोटे राजा, कहाँ चले?" शम्भुराजा ने शीघ्रता से गर्दन घुमाई और दुखी स्वर में बोले, "खेलोजी, बाबा, अब सब समाप्त हो चुका है। इसके बाद आपके और हमारे रास्ते अलग अलग हैं।" "ऐसे क्या कट्टर शत्रु की तरह बोल रहे हो, युवराज? शिवाजी महाराज का पुत्र और खान की छाया में? पूनम कैसे खड़ी होगी अमावस के साथ?" खेलोजी जी-जान से युवराज को मना रहे थे, "बस युवराज! अब इससे आगे एक कदम भी न बढ़ाओ। चुपचाप वापस आ जाओ।" 110 · सम्भाजी