छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभोर होने से बहुत पहले ही दुर्गाबाई अपनी दो विश्वस्त दासियों को साथ लेकर महल से बाहर निकलीं। सूरज की पहली किरण निकलने के पहले ही वे भैरोंबाबा का दर्शन करके वापस भी लौट आयीं। सीढ़ियों पर शम्भूराजा उनकी प्रतीक्षा में खड़े थे। दुर्गाबाई वहाँ आयीं और भावुक होकर कहने लगीं— "बेचारा बहुत भला आदमी दिखता है। औरंगजेब द्वारा फँसाये जाने का दुख तो उसे है ही किन्तु इस समय वह एक दूसरी ही घरेलू समस्या से पागल हो रहा है।" "क्या ? हुआ क्या है ?" "उसकी बेगम बच्चों को जन्म देते ही मर गयी। उसने दो बच्चियों को जन्म दिया था। उन बच्चियों को पालने पोसने में मियाँखान ने अपनी उम्र गँवाई। छ महीने पहले बीजापुर के एक जमींदार के दो बेटों के साथ इन जुड़वाँ बहनों का विवाह निश्चित हो चुका है। चार दिनों के बाद विवाह की तिथि है।" "फिर ?" "मियाँखान ने अपने दामादों के लिए दहेज की बहुत बड़ी रकम कबूल की थी। उन बेटियों की माँ नहीं है और बाप ऐन मौके पर कैदखाने में बन्द हो गया। वह महसूस कर रहा है कि घर के नौकर चाकरों से विवाह का कार्य ठीक ठीक नहीं हो पाएगा। शादी टूट भी सकती है। दुर्भाग्य से इसकी गलती लड़कियों के माथे पर ही आएगी। दुनिया समझेगी कि लड़कियों में ही कुछ खोट है। लड़कियों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा। यही समस्या इस अभागे बाप को पागल बना रही है।" उसकी दर्दभरी कहानी सुनकर शम्भूराजा का मन पिघल गया। उसी दिन वे हवेली की छत पर से इधर उधर देख रहे थे। वे यह सोचकर अधीर हो रहे थे कि अभी तक अँधेरा होते ही शम्भूराजा की उस हवेली में अनेक हलचलें उग आयीं। उन्होंने रसोईघर में काम करने वाले जैमुद्दीन को बुला लिया। युवराज उस मोटे थुलथुल दाढ़ी वाले बुड्ढे जैमुद्दीन को प्रसन्नतापूर्वक देखते ही रह गये। शम्भूराजा ने रात के अँधेरे में अपने विश्वस्त सहयोगियों के साथ जैमुद्दीन को उस रहस्यमय घर की ओर भेज दिया। स्वयं शम्भूराजा हवेली के दरवाजे पर आकर पटाखे फोड़ने लगे। उनके नौकर-चाकर भी चन्द्र ज्योति और उत्सव का आनन्द लेने लगे। आसपास सभी जगह हलचल मच गयी। शम्भूराजा के कुछ सेवक वहाँ पर एकत्र लोगों को जलेबियाँ बाँटने लगे। हवेली के सामने पटाखों की आतिशबाजी चल रही थी। उसे देखने के लिए आसपास के सभी पहरेदार जमा हो गये। उसी समय पिछवाड़े के 122 सम्भाजी