छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें“उसको एक ही पत्थर से दक्खिन में अनेक पक्षियों का शिकार करना है। आलमपनाह की इच्छा है कि आप शिवाजी, बीजापुर और गोलकोंडा पर आक्रमण करो और शिवाजी के बेटे को बगल में लेकर चारों दिशाओं में घूमो।” दिलेरखान ने जियाखान से पूछा-“मौजूदा स्थिति में हम कहाँ जंग लड़ सकते हैं?” “भूपालगढ़।” “भूपालगढ़? कहाँ है यह?” “बीजापुर के रास्ते में, बानूर गाँव के पास। जत के आसपास।” “किसका किला?” “मराठों के ही कब्जे में है। उस किले की तटबन्दी बहुत मजबूत है। उस किले का मराठा किलेदार भी फौलादी सीने वाला है। किन्तु यदि यह किला हाथ में आ जाए तो बीजापुर की नाक में नकेल डालना बहुत आसान हो जाएगा।” दिलेरखान के दिमाग को अनेक पैर निकल आये। उसने तत्काल भूपालगढ़ के सम्बन्ध में छोटी से छोटी जानकारी इकट्ठी करनी आरम्भ कर दी। एक समय चाकण के पास के किले में पचावन दिन तक निरन्तर लड़ते हुए बहादुर फिरंगोजी नरसाल। न शाडस्ताखान की नींद हराम कर दी थी। वही फिरंगोजी इस समय भूपालगढ़ का किलेदार था। विट्ठल भालेराव उसका कुशल सचिव था। दिलेरखान को सूचना मिल रही थी कि किले में बड़ी मात्रा में बारूद और अनाज रखा गया था। किले पर बाणोबा अर्थात् महादेव का जागृत मन्दिर था। वहाँ के निवासियों का फिरंगोजी और महादेव पर अटूट विश्वास था। बहादुरगढ़ में भूपालगढ़ पर आक्रमण की योजनायें बड़ी तेजी से निश्चित हो रही थीं। एक दिन सुबह सुबह बहादुरगढ़ के किले से घुड़सवारों की फौज बाहर जाने लगी। तोपों की गाड़ी के पहिये भी आवाज करते हुए चलने लगे। फौज के माथ जाने वाला बाजार तो भोर से सक्रिय हो गया था। वणिक, पानी ढोने वाले भिश्ती आदि सभी अपने घोड़ों और खच्चरों के साथ बाहर निकल रहे थे। शम्भूराजा अपनी हवेली में चिन्ताग्रस्त बैठे थे। एक तो दिलेरखान ने इस लड़ाई के सम्बन्ध में उन्हें स्पष्ट रूप से कुछ नहीं बताया था। दूसरे दो दिन पूर्व ही शृंगारपुर से कवि कलश और रायगढ़ से रानी येसूबाई के गोपनीय पत्र एक साथ उन्हें मिले थे। दोनों पत्रों में एक ही तरह के समाचार थे। “युवराज अब वहाँ खाली मत बैठिये। कुछ कीजिये। जब से आप यवनों से जाकर मिले हैं तब से यहाँ पर आपके विरोधियों ने आपकी बदनामी के कारखाने खोल लिये हैं। कुछ लोगों ने तो ऐसी अफवाह फैलायी है कि नेताजी पालकर की तरह शीघ्र ही इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाले हैं। अपनी इच्छा पूरी करने में यदि भाग्य साथ नहीं दे रहा है, आपको अपनी वीरता दिखाने का अवसर नहीं मिल रहा है तो जो है कम से कम सम्भाजी :. 127