छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआफ़त एक आधी रात का समय। हड्डी कँपा देने वाली शीत लहर चल रही थी। हजार कोशिश करने पर भी आज गोदू को नींद नहीं आ रही थी। घर के पास पुराने पीपल के पेड़ की डालों और समीप के बाँसवन से वायु के वेग का पता चल रहा था। पीपल के छोटे-छोटे फल टप-टप की आवाज करते खपरैल की छत पर गिर रहे थे। गोदू ने करवट बदलने के लिए गर्दन घुमाई। उसकी कलाई पर हरी चूड़ियाँ चमक रही थीं। अभी उतारी नहीं गयी थीं (मराठी प्रथा के अनुसार शादी के अवसर पर पहनाई गयी चूड़ियाँ 17 दिन, 1 वर्ष या 12 महीना बाद उतारी जाती हैं और दूसरी चूड़ियाँ पहनाई जाती हैं)। अभी उसकी शादी हुए एक महीना भी पूरा नहीं हुआ था। संध्या समय की लालिमा ढल जाने के बाद मन्दिर के बाहर सासू माँ का बिछौना लगाकर गोदू अपने कमरे में आ जाती थी। अपने कमरे में लेटते ही गोदू को अपने पति के दबे पाँव आने की आहट सुनाई देती थी। आज की रात गोदू को कुछ अजीब-सी लग रही थी। मन्दिर के दीये कब के बुझ चुके थे। दूसरी ओर से सासू माँ के खर्राटों की आवाज आ रही थी। रात बहुत हो चुकी थी। किन्तु कमरे के बाहर उसके पति निवासराव का कहीं अता-पता न था। हाँ, तबेले में जानवर और दड़बे में मुर्गे-मुर्गियाँ अभी भी जाग रहे थे। आज की रात गोदू को बहुत अजीब, उदास और भयंकर लग रही थी। बीच ही में वह बिस्तर से उठी। बरामदे को पार करके उसने धीरे-से आँगन की ओर आँख घुमाई। मुख्य दरवाजे के भीतरी हिस्से में एक तेज मशाल जल रही थी। गोदू के ससुर त्र्यम्बकराव चिन्तित मुद्रा में दोनो पैरों पर बैठे थे। उनके ठीक सामने निवासराव कुछ खोये-खोये से अपने पिताजी को एकटक देख रहे थे। उस मन्त्रणा में भयानक चेहरे वाले तीन व्यक्ति और थे जिन्हें गोदू नहीं पहचानती थी। त्र्यम्बकराव बारह गाँव के देशपांडे अर्थात् अधिकारी थे। गोदू ने सोचा देशपांडे नाम इसी पद के कारण बना होगा। गोदू ने इस मुद्दे को टालने की कोशिश की। सम्भाजी :: 11