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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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सामने खुले मैदान में चारपाई डालकर बैठे थे। शानदार शामियाने के भीतर दीप जल रहे थे। मशालची मशाल लेकर इधर उधर घूम रहे थे। इसी समय किले से उतरते हुए सात सौ मराठों का एक दल आया। उन सभी के हाथ पीछे पीठ पर बँधे थे। बाहर ठंडी हवा चल रही थी। शम्भूराजा के सामने उन मराठा कैदियों को दूसरी जगह स्थानान्तरित किया जा रहा था। युवराज को देखते ही मराठों का वह दल रुक गया। शम्भूराजा मराठा सैनिकों के सामने गये। उनमें से अनेक सैनिक युवराज को पहचानते थे। कुछ आश्चर्य से तो कुछ क्रोध से शम्भूराजा को आँखें दिखा रहे थे। वे अपनी ऐंठी हुई खिचड़ी मूंछों और लाल लाल आँखों से शम्भूराजा का पूरा शरीर जला रहे थे। कुछ सैनिकों ने अपनी गर्दनें नीचे झुकाकर शम्भूराजा का अभिवादन किया। स्वराज्य की इस दौलत को देखकर शम्भूराजा का मन भर आया। उन्होंने दिलेरखान से पूछा—"खान साहब इन कैदियों को कहाँ भेज रहे हो?" "इन्हें बहादुरगढ़ के जेलखाने में भेज रहे हैं।" "खान साहब, याद रखिएगा, बन्दी बनाने के अतिरिक्त इन्हें और कोई सजा नहीं होनी चाहिए।" युवराज ने आदेश दिया। दूसरे दिन सुबह युवराज की नींद लोहे के फावड़ों की आवाजों से खुली। युवराज को अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था। दिलेरखान ने मजदूरों की कई टोलियाँ लगाई थीं। इन मजदूरों से वह भूपालगढ़ की तटबन्धी की दीवार तुड़वा रहा था। युवराज उसकी मूर्खता को देखकर चकरा गये। वे उठकर सीधे दिलेरखान के शामियाने में चले गये। शामियाने की खिड़की से ऊपर की ओर इशारा करते हुए वे बोले, "खानसाहब यह क्या चला रखा है? एक बार किला हाथ लगने पर वहाँ शासन करने की बजाय उसे श्मशान बनाने का यह क्या तरीका है?" दिलेरखान उपहास करते हुए बोला, "वैसे यहाँ किला बनाये रखने से चलेगा भी नहीं। अपनी बंजर जमीन पर किला देखकर कुनबी जाति के बच्चे राजा बनने का ख्वाब देखने लगते हैं।" इन अपमानजनक शब्दों को सुनकर शम्भूराजा को क्रोध आ गया। माहुली के पास कृष्णा नदी को पार करके मुगलों के क्षेत्र में पहुँचने के समय से ही अपशकुन सूचक घटनाएँ घटने लगी थीं। युवराज अपने कुछ सहयोगियों के साथ गढ़ पर बाणोबा का दर्शन करने के लिए निकले। साथ में दुर्गाबाई और राणूबाई की पालकियाँ भी थीं। चढ़ाई पर घोड़े बिना सवारी के चल रहे थे। शम्भूराजा के पैर योंही पत्थरों से टकरा रहे थे। पीछे तटबन्दी तोड़ने वाले गहदालों और कुदालों की आवाज आ रही थी। पिछली सात पीढ़ियों के पुण्य के प्रभाव से शिवाजी महाराज ने राज्य का निर्माण किया। हम कहीं सम्भाजी : : 131