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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 134, कुल 793 में से

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उसकी तटबन्दी तो नहीं तोड़ रहे हैं। इस कल्पना से युवराज का सिर चकरा रहा था। बीच रास्ते में एक काजी साहब मिले। युवराज को सलाम करते हुए बोले, "बादशाह औरंगजेब अगले हफ्ते से गैर मुसलमानों पर जजिया कर लगाने वाला है। ऐसी अनीति औरंगजेब के बाप तो क्या उसके दादा ने भी नहीं की थी।" चलते-चलते शम्भुराजा स्वयं से ही बोले, "लगता है काजी के रूप में यह समाचार बाणोबा ही दे रहे हैं। हिन्दू प्रजा पर जजिया जैसा अमानवीय कर लगाने वाला औरंगजेब हमें क्या न्याय देगा?" समय बहुत बुरा आ रहा है। यह सोचते हुए शम्भुराजा बाणोबा के शीतल गर्भगृह में पहुँच गये। भगवान के चरणों पर सिर रखकर वे बहुत समय तक बैठे रहे। राणूबाई ने इक्कीस नारियल की माला और अपने गले का सोने का हार बाणोबा की पिंडी पर चढ़ाया। पुजारी ने उन्हें मंगल आशीर्वाद दिया। राणूबाई बड़ी व्यग्रता से पुजारी से बोलीं, "गुरुजी वचन दीजिए कि इस बार हमारे युवराज को पुत्र ही होगा।" मन्नत के फल जानने के लिए राणूबाई पुजारी से आग्रह कर रही थीं। राणूबाई की बात सुनते ही दुर्गाबाई के चेहरे पर वसन्त की बहार आ गयी। वे मुस्करा पड़ीं। शम्भुराजा आश्चर्य से दोनों की ओर देखने लगे। वे सोचने लगे कि इस भागदौड़ में यह मधुर भार उठाकर किस तरह और कितना दौड़ा जा सकता है। संभाजी राजा के मन की शान्ति अधिक समय तक नहीं टिक सकी। वे वहाँ विश्राम कर रहे थे। इसी समय उनके चार विश्वस्त सेवक दौड़ते हुए वहाँ पहुँचे। वे अत्यधिक डरे और सहमे हुए थे—'युवराज ऽ युवराज ऽऽ' कहते हुए वे मर्मभेदी दहाड़ें मार रहे थे। उनकी आवाज सुनकर शम्भुराजा तेजी से उठे। उन्हें विश्वास हो गया कि कोई बड़ा धोखा हो गया है। उन्होंने अधीरता से कहा, "बोलो बोलो! कहो क्या हो गया?" "महाराज, बहुत अन्याय हो गया। बहुत अन्याय हो गया।" उनमें से एक बोला। दूसरा अत्यन्त भयभीत स्वर में कहने लगा—"कल किले पर बन्दी बनाये सात सौ मराठा सैनिक, जिन्हें नीचे ले जाया गया था..।" "अरे क्या हुआ उन्हें?" युवराज की साँस फूलने लगी। "अब कैसे बतायें महाराज ?" उन सेवकों की आँखों से धारासार आँसू बहने लगे। दहाड़ें मारते हुए एक बोला, "युवराज, उन दुष्टों ने सात सौ में से आधे सैनिकों के एक-एक हाथ काटकर अपाहिज बना दिया और बचे हुए आधे सैनिकों के एक-एक पैर काटकर उन्हें लँगड़ा बना दिया। इनसानों की तो क्या ऐसी दुर्गति 132 :: सम्भाजी

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