छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाला आया और उमकी नोक तेजी से बालेखान की पीठ में घुस गयी। देखते- देखते बालेखान अपने ही खून के गड्ढे में गिर गया। स्वयं शम्भूमहाराज, उन्हें घेरकर खड़े हजारों मुमलमान सैनिक और भाला फेंकने वाले मुनासिबखान सभी आश्चर्यचकित रह गये। दूसरे ही क्षण मुनासिब बालेखान की ओर झपटा। खून से लथपथ बालेखान का शरीर उसने बाँहों में भर लिया। उसे पानी पिलाने का भी व्यर्थ प्रयास किया। बालेखान तो कब का समाप्त हो चुका था। मुनासिब उसके लिए दहाड़ें मारकर रो रहा था। मुनासिबखान के अनेक फौजी साथी आगे आये। उन्हें अपने मालिक पर बहुत क्रोध आया। उनमें से एक ने बहुत सन्तप्त होकर पूछा—“चाचा, एक जहन्नमी काफिर को बचाने के लिए आपने यह क्या किया? अपने भतीजे को ही मार डाला?" बालेखान के शव को देखकर एकबार पुनः मुनासिब को रोना आया। आँसू बहाते हुए वह बोला, “जो हुआ वह बहुत बुरा हुआ। दोस्तोऽऽ यह तुम्हारा मुखिया था और मेरा इस दुनिया में एकलौता वारिस।” "वही कह रहा हूँ खानसाहब ! एक मूर्ख काफिर के लिए अपने ही बच्चे की हत्या करने की आपको क्या ज़रूरत थी?” "क्यों बेटे, सिर्फ एक मुर्दा देखकर तुमको इतना बुरा लग गया?" "मतलब?" अपने सहयोगियों पर एक तीखी नजर फेंकते हुए मुनासिबखान गरजा, “अथणी और तिकोता में उस बदमाश दिलेरखान ने भरे चौक में किसकी इज्जत लूटी थी? अनेक औरतों, माँ, बहनों को नंगी करके पेड़ों पर किसने लटकाया था? भूल गये आप लोग? उन बेसहारा औरतों में हिन्दू कम मुसलमान ज्यादा थीं। किन्तु उस दारुण दृश्य को देखकर तुम में से किसी की भी तलवार म्यान से बाहर क्यों नहीं निकली?" "याने?" "उस अत्याचार को देखकर जिसके शरीर का खून खौल उठा था, उस अत्याचारी दिलेरखान पर आक्रमण करने जो व्यक्ति गया था, वह एक ही व्यक्ति था शिवाजी का बेटा। आप में से कोई नहीं था। तब कहाँ थीं अपनी तलवारें? कहाँ चुप बैठी थी यह मर्दानगी?" सभी चुप हो गये। मुनासिब की बात से सभी चकरा गये। उनमें से एक ने अधीर होकर पूछा- "चाचा, आप कहना क्या चाहते हैं?" "बस इतना ही! हम सबकी बड़ी इच्छा थी। इसलिए छः महीने पहले हम सम्भाजी १२१