छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 152, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंसब अपनी बीजापुर की चाकरी छोड़कर दिलेरखान से मिल गये। वह हमारी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा गुनाह था। आज औरंगजेब का एक सरदार दक्खिन में आकर हमारी मुस्लिम माँ-बहनों पर इतना अत्याचार कर रहा है तो कल औरंगजेब के आने के बाद क्या होगा?'' “चाचा, आप ठीक कहते हैं।'' सामने से कुछ आवाजें आयीं। “मैं ख़ुदा की कसम खाकर कहता हूँ आज शियापन्थी दक्खिन मुसलमानों के लिए सबसे बड़ा काफ़िर बादशाह औरंगजेब है। बच्चो! दिल्ली का यह शैतान मराठों का राज्य नेस्तनाबूद करने में कामयाब हो गया तो अपनी बीजापुर और गोलकुंडा की सल्तनतों को एक दिन के लिए भी ज़िन्दा नहीं छोड़ेगा। हम कैसे भूल सकते हैं? पिछले साल बीजापुर की सहायता के लिए शिवाजी महाराज ने दस हजार बैलों की पीठ पर लादकर अनाज भेजा था। औरंगज़ेब ने नहीं। इसलिए कहता हूँ कि औरंगजेब के अत्याचारों से दक्खिनियों को मुक्ति दिलाने के लिए शिवाजी का राज्य बना रहना चाहिए।'' मुनासिबखान ने अपनी कमर की कटार बाहर निकाली। बात ही-बात में उसने शम्भुराजा के सारे बन्धन काट दिये। सामने से उसने अपने कुछ साथियों को पास बुलाया। शम्भुमहाराज को ले जाने के लिए आये हुए लोगों को पच्चीस-तीस नये घोड़े दिये। शम्भुराजा की पीठ पर प्यार से हाथ थपथपाते हुए मुनासिब ने अपने साथियों से कहा, “शिवाजी पर एहसान करने के लिए नहीं, दक्खिन की हिफ़ाज़त के लिए शिवाजी का बेटा सलामत रहना चाहिए। जाऽऽ बेटेऽऽ भाग जा। निश्चिन्त होकर निकल जाऽऽ।'' शम्भुराजा ने ख़ून से लथपथ अपनी बाँहों में मुनासिब को भर लिया। सभी को अलविदा कहा। संभा किस चतुराई से भाग गया? दिलेरखान को क्या बताया जाय? यही सोचते-सोचते बीजापुरी फौज वापस लौटी। फौजी बालेखान का खून से भीगा शव कन्धे पर उठाये दफ़नाने के लिए ले जा रहे थे। साथ में घोड़े पर चल रहा मुनासिब अपने वारिस के शव को बार-बार देख रहा था। वह अपनी बूढ़ी दाढ़ी पर निरन्तर गिर रहे आँसुओं को पोंछने का प्रयास कर रहा था। 150 · सम्भाजी