छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 150, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंमुनासिबखान अपने साथ के सैनिकों को लेकर जंगल में घुसा। किन्तु शम्भूराजा और उनके साथी तेज गति से आगे निकल चुके थे। उनका पीछा करते हुए बालेखान की फौज बहुत आगे जा चुकी थी। यह जानकर मुनासिब हैरान हो गया। अपने घोड़े को बार-बार ललकारते हुए, उस जानवर को अपनी जाँघों से दबाते हुए वह पवन की गति से आगे निकल रहा था। शाम होने को आ गयी। परछाइयाँ जंगलों में उतरने लगीं। नाचता हुआ मोर जिस प्रकार अपने पंख समेटता है उसी प्रकार सूर्य की एक-एक किरण विलुप्त हो रही थी। सूर्य डूब चला। एक पहाड़ी पर से मुनासिबखान ने घाटी में देखा। वहाँ एक बड़ा झरना बह रहा था। झरने के किनारे शम्भूमहाराज को एक पेड़ के तने से बाँधा गया था। जंगल में आकर उनसे मिले साठ शृंगारपुरी सैनिकों में से आधे मरकर एक ओर गिरे थे। पीछा करते समय बड़ी लड़ाई हो चुकी थी, यह साफ साफ दिखाई पड़ रहा था। शम्भूराजा का सारा शरीर खून से लथपथ था। चेहरा भी खून लगे खरोंचों से भर गया था। उनकी खरोंचों और उनके शरीर के घावों से स्पष्ट दिख रहा था कि इस बहादुर ने कम-से-कम साठ-सत्तर लोगों को घायल किया होगा। उनका और बालेखान का जोरदार झगड़ा चल रहा था। उनके झगड़े को मुनासिबखान ऊपर से देख रहा था। बालेखान हाथ में तलवार नचाते हुए संभाजी राजा के सामने नाच रहा था। दोनों क्रोधित होकर एक-दूसरे को गालियाँ दे रहे थे। यह दृश्य देखकर मुनासिब का कलेजा हिल गया। वह अपने भतीजे की ओर देखकर चिल्लाया—"बेटे बालेखानऽ ठहरोऽऽ। आगे मत बढ़ोऽऽ। खुदा के वास्ते बेटेऽऽ।" ऐसा कहते हुए उसने घोड़े पर से नीचे छलाँग मारी। घोड़े पर जो हथियार लदे थे उसमें से पल्लेदार भाला हाथ में लिया। भाले के डंडे का सहारा लेते हुए सीधे रास्ते से उतरते सरकते नीचे जाने लगा। अभी भी बालेखान और शम्भूराजा के झगड़े की ऊँची आवाज उसके कानों तक पहुँच रही थी। सरकते सरकते नीचे जाने वाला मुनासिबखान बीच-बीच में बोल रहा था, "बेटे बालेखान कुछ मत करना। मैं आ रहा हूँ, बेटे।" मुनासिब ढलान उतरकर कुछ ही दूर गया था कि उसने देखा। कि क्रुद्ध बालेखान आगे बढ़कर बँधे हुए शम्भूराजा को मुट्ठियों से मार रहा है। उन्हें गालियाँ दे रहा है। क्रोध-उन्मत्त होकर उसने शम्भूमहाराज की दाढ़ी पकड़कर खींची। शम्भूराजा बहुत चिढ़ गये। उन्होंने बालेखान के मुँह पर जोर से थूक दिया। इस पर बालेखान अपने क्रोध पर नियन्त्रण खो बैठा। उसने म्यान से अपनी तलवार खींच ली। तलवार की नोक से शम्भूराजा के सिर पर वार करने ही वाला था कि पीछे से एक गर्जना आयी—"बालेखानऽऽ बेटेऽऽ।" उसके ठीक बाद तीर की गति से 148 :. सम्भाजी