छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें"हम फिर से मिल गये, यह जगदम्बा की महंती कृपा है। किन्तु एक बात हमेशा याद रखना कि मोह-माया में न फँसते हुए राजा को अनेक बार कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं।" शम्भुराजा ने चकित भाव से महाराज की ओर देखा। महाराज आनन्दित होकर बोले, "जिस समय मैं कर्नाटक की ओर था उस समय आपने गरीब किसानों और मजदूरों के कर में छूट देने का निर्णय लिया, उसकी मैंने पूरी पूछताछ की है। उससे प्रसन्न होकर इस बूढ़े राजा ने अपने युवराज को नहीं, प्रजा के हित में कार्य करने वाले उत्तराधिकारी को शुभाशीर्वाद देने का निश्चय किया।" शम्भुराजा शिवाजी महाराज की ओर आश्चर्य से देखने लगे। तब उनके कन्धे पर हाथ रखकर शिवाजी महाराज ने कहा, "अभी तक औरंगजेब काबुल, कन्धार जैसी अनेक लड़ाइयों में उलझा हुआ था। किन्तु शम्भू, गुप्तचरों से मिली सूचनाएँ बहुत चिन्ताजनक हैं। साल-दो-साल में औरंगजेब बड़ी फौज लेकर दक्खिन में आये बिना नहीं रहेगा। इसीलिए उसने गुजरात, बुरहानपुर और मालवा में भी डेढ़ दो लाख की नयी फौज तैयार कर ली है।" शम्भुराजा बड़े महाराज की ओर देखकर ठठाकर हँसे। गर्व से महाराज की ओर देखते हुए उन्होंने कहा, "पिताजी, अब समझ में आया कि पिछले कुछ सालों से आप फिरंगियों से इतना अधिक बारूद क्यों खरीद रहे हैं?" "बेटे! मेरे सच्चे बारूद तो आप हैं। एक मिर्जाराजा जयसिंह और दूमरा दिलेरखान, ये दो ही सरदार औरंगजेब ने महाराष्ट्र में भेजे थे। उन दोनों ने ही हमारी नाक में दम करके पुरन्दर की अपमानजनक सन्धि पर हस्ताक्षर करने के लिए विवश कर दिया था। हमारी पीठ पर दहशत की तलवार लगाकर आगरा जाने के लिए विवश किया था। आज तो पूरे स्वराज्य पर दस्तूरखुद औरंगजेब के आक्रमण का भय निर्मित हो गया है। यह नहीं भूलना चाहिए कि आज दुनिया के दो तीन बड़े साम्राज्यशालियों में औरंगजेब एक है। उसका सामना दक्षिण के मैदान में केवल हमारा बेटा कर सकता है। यह घोषित करने के लिए हमें किमी ऐरे गैरे ज्योतिषी की आवश्यकता नहीं है-'बेटाऽऽ, उस कराल काल से जान की बाजी लगाकर लड़! यहाँ के हर जंगल को, पशु पक्षियों को, गरीब बच्चों को, प्रजा को मुक्ति दो'।" शम्भुराजा झट से नीचे झुके। बड़े महाराज के पैर छूकर कृतज्ञभाव से बोले- "पिताजी, आपके आशीर्वाद से मैं इधर का पर्वत भी उधर कर सकता हूँ।" शिवाजी महाराज मुस्कंराते हुए बोले, "बेटा! जूझना, लड़ना मनुष्य के हाथ में होताः है किन्तु नियति सम-विषम चाल और भाग्य की आड़ी-टेढ़ी रेखाओं पर मनुष्ट का वश नहीं होता। भविष्य में आपके और औरंगजेब के युद्ध के समय मैं रहूँ 156 :• सम्भाजी