छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंथे। महाराज ने निश्चय कर लिया कि जो कुछ होना है एक बार हो जाय। उन्होंने हँसने का अभिनय करते हुए कहा, "युवराज शम्भू यवनों से जाकर मिले कि उन्हें इस अपराध की सजा नहीं दी गयी। इसकी शिकायत लेकर मेरे पास कोई नहीं आया। किन्तु मुझे पक्का विश्वास था अण्णाजी पन्त शिकायत लेकर अवश्य आएँगे।" "हमारा इतना ही कहना है महाराज ! शम्भूराजा कास्तकारों को बहुत चाहते हैं। उनके लिए बहुत दया भाव रखते हैं। कर डुबाने वालों का कर माफ कर देते हैं।" "अण्णाजी उस सारे प्रकरण की मैंने गहराई से पूछताछ कर ली है। हमारे गुप्तचरों ने उन गरीब किसानों की सही जानकारी जब मुझे दी तो मुझे मालूम पड़ा वे किसान खाने के लिए भी मोहताज थे। यदि शम्भू ने उन्हें माफ न किया होता तो यह एक अपराध होता।" तो भी शम्भूराजा का व्यवहार अनेक बार अच्छा नहीं रहा है, महाराज।" शिवाजी महाराज चकित हो गये। उन्हें इस बात का कतई अनुमान न था कि अण्णाजी इस प्रकार का नाजुक प्रश्न भरी सभा में उठाएँगे। इन सारी बातों का मूल स्रोत अण्णाजी से जुड़ा था इसलिए इतनी स्पष्टता से बात को उठाना उचित नहीं था। इसलिए महाराज को लगा कि अब कुछ भी छुपाना ठीक नहीं हैं उन्होंने दृढ़ता से सीधे-सीधे कहा, "देखो अण्णाजी पन्त ! आप की जवान बेटी की मृत्यु जिस प्रकार दुर्घटना में हुई उसका आपको कितना गहरा दुख होगा, इसकी कल्पना हम कर सकते हैं। इस सम्बन्ध में शम्भूराजा के सम्बन्ध में पूरी जानकारी लेने का काम मैंने महारानी सोयराबाई को सौंपा था। उनकी सारी पूछताछ के बाद ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला कि इस दुर्घटना में शम्भू दोषी हैं।" "महाराज! आपने तो मुसलमान सूबेदार की बहू को भी साड़ी-चोली दी थी।" "उसी तरह हम आपसे वादा करते हैं अण्णाजी पन्त, शम्भू के दुर्व्यवहार का आप कोई प्रमाण प्रस्तुत कीजिए। यदि वे अपराधी सिद्ध होते हैं तो हम अपने पुत्र को उचित दंड अवश्य देंगे। उन्हें कैद करेंगे।" "महाराज! हमारी गोद का क्या हुआ?" अण्णाजी पन्त पीछे हटने को तैयार नहीं थे। "देखो, उसकी फरियाद और रंगपंचमी के दिन हुई सारी गड़बड़ी की मैंने बड़ी बारीकी से जाँच-पड़ताल कर ली है। त्र्यम्बकराव और निवासराव, पिता-पुत्र को शत्रु का साथ देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। उन दोनों ने लिंगाणा के ऊपर की कालकोठरी से रात में बाहर भागने का प्रयत्न किया। इस कोशिश में वे दोनों पहाड़ 164 . सम्भाजी