छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 177, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंकि उनकी मनोवांछित योजना अवश्य पूरी होगी। महारानी आकर सामने पलँग पर बैठ गयीं। अण्णाजी पन्त बड़ी आत्मीयता से अभिवादन करके कहने लगे- "महारानी! अब अधिक समय गँवाना किसी के भी लिए अच्छा नहीं है। बाहर प्रजा उलझन में पड़ गयी है, सेना भी बेहाल हो रही है। उन्हें यदि समय पर निश्चित आदेश दिया गया तो ठीक रहेगा।" "इतनी शीघ्रता करनी होगी क्या?" "शीघ्रता? महारानी महाराज की मृत्यु के समाचार को जितना ही छुपाया जा रहा है, यह समाचार उतनी ही तीव्र गति से बाहर फैल रहा है। इसके साथ ही सिंहासन को अधिक समय तक खाली रखना अराजकता को निमन्त्रित करना है।" सोयराबाई और भी चिन्ताग्रस्त हो गयीं। उनकी वेदना छिप नहीं पायी। दीर्घ निःश्वास छोड़ते हुए उन्होंने पूछा- "किसको बिठाएँ सिंहासन पर? शम्भूराजा के बदले यदि हमने राजाराम को गद्दी पर बिठाया तो क्या प्रजा इसे स्वीकार करेगी? वरिष्ठ लोग इससे सहमत होंगे क्या?" "आप ऐसे ऐन मौके पर इस प्रकार पीछे क्यों हट रही हैं? सोयराबाई को स्मरण दिलाते हुए अण्णाजी ने कहा, "आपने बड़े महाराज को बहुत समीप से देखा है। क्या उन्होंने कभी भी शम्भूराजा को राज्य देने की बात कही? क्या आपको ऐसा कोई प्रसंग स्मरण है?" "किन्तु उन्हें राज्य नहीं देना है ऐसा भी तो महाराज ने कभी नहीं कहा।" अण्णाजी ने अपने रेशमी रूमाल से पसीने से तर चेहरे को पोंछ लिया। सोयराबाई को अधिक सचेत करते हुए उन्होंने कहा, "महारानी जी आप ही सोचिए बड़े महाराज के अन्तिम आठ दिनों से हवा किस दिशा में बह रही है?" सोयराबाई कुछ सम्भ्रम के साथ बोलीं, "उन दिनों तो महाराज अर्धचेतन अवस्था में रहते थे। बीच-बीच में कुछ स्मरण करते हुए कहने लगते थे- 'शम्भू को बुला लीजिए, मेरे शम्भू को बुला लीजिए'।" "बुला लेने का मतलब यह थोड़े ही होता है कि गद्दी पर बिठाइए। मृत्यु के समय मनुष्य की जान छटपटाती है, बाल बच्चों की याद आती है। इससे अधिक इसमें कुछ नहीं है।" अण्णाजी की इन बातों से सोयराबाई और भी दृढ़ दिखाई देने लगीं। अपने को न रोक पाने के कारण अण्णाजी चिन्तातुर होकर बोले, "महारानी जी कृपा कीजिए, जल्दी कीजिए। राज्यारोहण के निर्णय में आप विलम्ब कर रही हैं। महाराज की मृत्यु का समाचार छिपाने से बाहर लोगों में कुछ अलग ही शंका फैल रही है।" "कैसी आशंकाएँ?" सम्भाजी :: 175