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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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दरवाजे पर आकर खड़े हो गये। अण्णाजी और मोरोपन्त का हुक्म बजाने एक भी सिपाही आगे नहीं बढ़ा। उन दोनों की स्थिति भरे बाजार में हाथ नचाने वाले पागल जैसी हो गयी। हंबीरराव ने उप सेनापतियों को अपने समीप बुलाया और धीमे स्वर में कहा, "रूपाजी! आनन्दराव! इन दोनों को पकड़ लीजिए। इन्हें लेकर आज रात तक पन्हाला पहुँच जाइए। शम्भूमहाराज के सामने यह उपहार प्रस्तुत कीजिए। उनसे कहिए की कल भोर में पहली किरण के साथ यह हंबीरराव पन्हाला पर उपस्थित हो जाएगा।"

दो

कार्यों के पहाड़ सामने खड़े थे। अनेक प्रकार के कार्यों का झमेला भी बहुत अधिक था। असहयोग के कारण स्वराज्य की बिगड़ी हुई अवस्था को पुनः ठीक करना था। शम्भूराजा पन्हाला पर बहुत सावधान रहते थे। उन्हें नींद नहीं आती थी। उनकी आँखें जलती मशाल की तरह लाल हो गयी थीं; वे अपने निजी महल में आधी रात तक व्यस्त थे। इसी बीच उनके सेवक गयाजी ने अन्दर आकर सूचना दी कि रूपाजी भोसले मिलने के लिए आये हैं। ऐसा कहकर रायाजी बाहर चला गया। शम्भूराजा ने अपना कमरबन्द ठीक किया। गले में पहिनी कौड़ियों की माला से खेलते हुए शम्भूराजा बाहर के दालान में आ गये। रूपाजी ने झट से उठकर शम्भूराजा का अभिवादन किया और बड़ी प्रसन्नता से ऊँची आवाज में बोले, "महाराज हम जीत गये। आपको कैद करने वालों के ही हाथों में बेड़ियाँ पड़ गयीं।" "मतलब ?" आज दोपहर अण्णाजी पन्त और मोरोपन्त को कराड के समीप हंबीररावजी ने कैद कर लिया। उनकी मुश्कें बाँधकर उन्हें ही कर पन्हालगढ़ आये हैं। कल सुबह तक हंबीरराव भी आपकी सेवा में उपस्थित होंगे। "उत्तम! बहुत अच्छा! कैदियों को बन्दीखाने में बन्द कर दो। उन पर कड़ी नजर रखो। बाकी सब कल देखेंगे।" शम्भूराजा ने बड़ी प्रसन्नता से कहा। रायगढ़ पर कहने के लिए कोई भी राजा हो किन्तु स्वराज्य की जनता शम्भूराजा को ही सच्चा उत्तराधिकारी मानती थी। इसलिए पन्हालगढ़ पर उनसे मिलने के लिए सवारों और सैनिकों का निरन्तर ताँता लगा रहता था। अभी-अभी मिला समाचार कुछ साधारण नहीं था। राजनीतिक दृष्टि से

सम्भाजी :: 193