छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंके स्वामी होने वाले पर कोई इस तरह कीचड़ उछालता है क्या। वह भी महाराज के राजमहल के ठीक सामने। चारों ओर से भीड़ बढ़ गयी। भीड़ को देखकर त्र्यम्बकराव और निवासराव ने और जोर से दहाड़ें मारना शुरू किया। अपने मुँह पर स्वयं थप्पड़ मारते हुए त्र्यम्बकराव चिल्लाए, “लोगो देखो न्याय के घर में ही ऐसा अन्याय होगा तो हम गरीब कहाँ जाएँगे। अमीर उमरावों की नजर से बचाने के लिए क्या हमें अपनी बहू बेटियों को कत्ल कर देना होगा। “ऐ बुड्ढे तुमको तोप के गोले खाकर मरना है क्या?” एक सिपाही ने सामने आकर पूछा। “तुम्हारे पास क्या सबूत है?” दूसरे ने पूछा। “उल्टे मुझसे क्या सबूत पूछते हो; जाओ युवराज के महल की ओर, दरवाजा खोलो और देखो अपनी आँखों से कि किस तरह वहाँ मेरी बहू को बन्दी बनाया है। हे भगवान अब मैं कहाँ जाऊँ!” कुछ समय पश्चात् भीड़ के पीछे कुछ हलचल हुई। एक विशेष पालकी लेकर पालकी वाले शीघ्रता से वहाँ आये। शिवाजी महाराज के अष्टप्रधान मंडल में से एक न्यायाधीश प्रहलाद निराजी पालकी से उतरे। वाड़कर पिता पुत्र का तमाशा वहाँ चालू था। ‘सु’ कहते ही सुरहुरपुर समझ लेने वाले प्रहलाद निराजी के ध्यान में सारी बात आ गयी। उन्हें भी बहुत दुःख हुआ। उन्होंने बाहर के अशोभनीय प्रकरण को महाराज को बताया। इसके बाद हिन्दवी स्वराज्य के विद्वान काजी मुल्ला साबही वहाँ पर पहुँचे। वे भी घबराई निगाह से महाराज की ओर देखने लगे। महाराज ने तुरन्त निर्णय लिया। उन्होंने पिता पुत्र को अन्दर बुलाया। महाराज के चरणों पर अपना सिर जोर जोर से पटकते हुए चिल्लाकर बोला, “महाराज स्वयं युवराज ऐसी गलती करते रहेंगे तो हम जिन्दा कैसे रह सकेंगे? मुगलों के शासन में कहते हैं कि यदि कोई सुन्दर औरत रास्ते में दिखती है तो उसे अपने जनानखाने में खींच ले जाते हैं और यहाँ!” “खामोशऽऽ,” महाराज ऊँची और तीखी आवाज में बोले, “अपनी जबान सँभालो, अब तक बहुत बोल चुके हो।” शिवाजी महाराज की मुद्रा बहुत गम्भीर दिखाई देने लगी। सच बात यह थी कि भोर में भगवान की पूजा करके कीमती वस्त्रों को पहन कर महाराज रंगपंचमी मनाने के लिए बाहर निकलने वाले थे। इसकी तो उन्हें कल्पना तक न थी कि आज त्योहार मुहूर्त पर रंग के बदले उनके ऊपर बदनामी का अबीर फेंका जाएगा। युवराज शम्भूराजा की सौतेली माँ पुतलीबाई त्योहार के अवसर पर नीचे पाचाड़ गाँव के घर से किले पर आयी थीं। उन्होंने पोलादपुर के जौहरी से विशेष प्रकार के रत्नों की एक कंठमाला बनवायी थी। होली के विशेष अवसर पर वह अपने प्रिय युवराज शम्भूराजा को यह कंठमाला उपहारस्वरूप देना चाहती थी। किन्तु यहाँ पर यह सम्भाजी :: 19