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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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के किनारे जंजीरे का सिद्दी नामक विषधर सर्प, आज नहीं तो कल आक्रमण करने के लिए दिल्ली में तैयारी कर रहा औरंगजेब नाम का विषैला भुजंग और इनके अतिरिक्त अंग्रेज, डच जैसे विषैले सरीसृप तो आसपास हैं ही। इन सभी के गुंजलक से स्वराज्य को बचाना है, कविराज ! "जंजीरे के हब्शियों ने औरंगजेब का मांडलिक होना स्वीकार कर लिया है। किन्तु औरंगजेब और पुर्तगालियों के बीच मित्रता होने के पहले ही गोवा के पुर्तगालियों को ठिकाने लगाना है। गोला बारूद और अस्त्र शस्त्र की दृष्टि से पुर्तगालियों की शक्ति बहुत बड़ी है।" दो घंटे बाद पुर्तगाली वकील को दरबार में निमन्त्रित किया गया। वर्तुलाकार टोपी पहने, मोटे कपड़े की पतलून पहने, लाल रंग के लिबास में दो फिरंगी वकील दरबार में आये। उन्होंने शम्भूमहाराज को भारतीय शैली में अभिवादन किया। दुभाषिया के रूप में उनके साथ रामचन्द्र शेणवी था। उनके साथ शम्भुराजा के गोवा के वकील रामजी ठाकुर और येसाजी गम्भीरराव भी आये थे। रामचन्द्र शेणवी ने वाइसराय द्वारा भेजा गया सन्देश मराठी में पढ़कर सुनाया। "सिंहासनाधीश शम्भूमहाराज गोवा के नये वाइसराय का कौष्ट द-आल्ह्वेर का सादर नमन ! महाराज आपसे स्नेह सम्बन्ध स्थापित करने के लिए हम आपसे भी कहीं अधिक उत्सुक हैं।" शम्भुराजा ने हँसते हुए कहा, "वाइसराय साहब की सम्बन्ध जोड़ने की इच्छा से हमें बड़ी प्रसन्नता हो रही है।" पुर्तगाली दूतों ने दुभाषिये के माध्यम से स्पष्ट किया- "उसका एक कारण यह है कि सावन्तवाड़ी कुडाल के इलाके में आपकी और हमारी सीमाएँ आपस में जुड़ी हैं। इसलिए वाइसराय ने आपके लिए विशेष सन्देश भेजा है कि आप दक्षिणी सीमा पर अपना एक भी सिपाही तैनात न करें।" "क्यों ?" "क्योंकि आपके सिपाही बनकर पुर्तगाली स्वयं उस सीमा की रक्षा करेंगे।" "वाहऽऽ ! वाहऽऽ !" राजा ने हँसते हुए दाद दी। फिरंगियों ने अनेक बहुमूल्य वस्तुएँ राजा को भेंटस्वरूप प्रदान कीं। फिरंगी शिष्ट मंडल निकलकर चला गया। दोपहर को कुछ धार्मिक विधियाँ समाप्त हुईं। राज्यारोहण की जोरदार तैयारी हो रही थी। मंगल वाद्य बज रहे थे। गढ़ पर का वातावरण अत्यन्त उत्सवी और उत्साहपूर्ण था। सन्ध्या समय सभी नजदीकी सम्बन्धी एक वृत्त बनाकर खड़े हो गये थे। सभी की आँखें बातें कर रही थीं। संभाजी ने समझ लिया कि ये लोग किसी सम्भाजी :: 215

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