छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंछिपा साहसी सपना था। किन्तु दुर्देव ने पासा ही उलट दिया।" "कुछ भी कहिए। पूनम की धवल चाँदनी बिखेरता रहे तो भी चन्द्रदेवता के मुँह पर जो दाग है वह कभी पोंछा नहीं जा सकता। वैसे ही यह बदनामी का कलंक आपके साथ सदैव बना रहेगा।" येसूबाई ने स्पष्टता मे कहा। "और यदि वह चाँद जलकर खाक हो गया तो?" शम्भूमहाराज ने दाँतों मे होठ चबाते हुए क्रुद्ध आवाज मे पूछा। "अँ ? यह केसी भयानक बात कर रहे हे, महाराज ?" शम्भूमहाराज झट म उठकर बैठ गये। बाहर तूफानी हवा बह रही थी। रोशनदानों और खिड़कियों मे आवाजें आ रही थी। शम्भूराजा ने येसूबाई का हाथ मजबूती से पकड़ा। उन्हें लगभग खींचते हुए छज्जे में ले गये। आकाश बादलो मे भरा था। जरा सी चन्द्रकोर बादलो के पहाड के पीछे छिप गयी थी। येसूबाई के हाथ को अपने सीने पर खींचकर रखते हुए शम्भूमहाराज ने चन्द्रमा की रुख किया और विवाद भरे स्वर मे कहने लगे—"येसूरानी। यदि कभी इम मिट्टी ने आवश्यकता पड़ने पर पुकार लगाइ तो आपके ललाट का यह चाँद पिताजी के हिन्दवी स्वराज्य के लिए जलकर खाक हो जाएगा। परन्तु उस आसमान के चाँद मे पृछिए कि क्या किसी के लिए इस तरह जलकर खाक होने की तैयारी उमकी है?" सम्भाजी 219