छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंराजदंड एक "राजन! किले पर धुआँधार वर्षा और दिन में भी शुभ्र अँधेरा करने वाला कुहरा छाया है। उन मेहमानों ने अपने दिन कैसे काटे होंगे ?'' कवि कलश ने हँसते हुए पूछा। "कौन मेहमान ?'' "ब्रिटिशों के वे दोनों वकील—गैरी और राबर्ट। औरतों और उन बेचारों का निवास भी किले के ऊपर दूर पूर्वी छोर पर है। चट्टानों के ऊपर वहाँ बड़े बड़े झरने हैं। वहाँ रहने से तीन महीने में इन साहबजादों का प्राण निकलना ही बाकी होगा। उनका बटलर कहता था कि ये दोनों रात बेरात उठ जाते हैं। दो चट्टानो के बीच गिरने वाली पानी की धारा के साथ घूमने वाली हवा से उनकी नींद टूट जाती है। " "कविराज ! इतना विस्तार क्यों दे रहे हो ? साफ साफ बताइए कि आपका आशय क्या है ? "मिल लीजिए न उन बेचारों से एक बार ।" शम्भूराजा कुछ नहीं बोले। परन्तु उस रात कविराज और ज्योत्याजी केमकर के साथ बहुत देर तक विचार-विमर्श करते रहे। पुर्तगालियों से मुम्बई का टापू अँग्रेजों के हाथ में आ गया। मुम्बई में अँग्रेजों के व्यापार के साथ साथ उनकी मनमानी भी बढ़ने लगी। मुम्बई से अधिक सूरत की चौकी मराठों के लिए चिन्ता का विषय बन गयी। सूरत वाले अंग्रेज अधिकारियों को अधिक महत्त्व देते थे। वे अँग्रेजों के लिए गोला-बारूद की आपूर्ति करते थे। इसीलिए अँग्रेजों की मनमानी भी बढ़ती जा रही थी। कोंकणतट जल रहा था। इस भयंकर समय में संभाजीराजा ने कवि कलश को दक्षिण कोंकण में भेजा था। वे अभी अभी कीचड़ और वर्षा को रौंदते हुए रायगढ़ वापस आये थे। शम्भूमहाराज की इच्छा थी कि डिचोली और कुडाल में अपने बारूद के कारखाने खोले जायँ। यदि अपने कारखाने खुल जाएँ तो 220 :: सम्भाजी