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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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सिद्दी के विरुद्ध कोई जंग नहीं छेड़ी थी। सिद्दी नाम के इस कालसर्प ने मुरुड, तला, म्हसला से कोंकण तट तक के प्रदेश पर कब्ज़ा कर लिया था। सिद्दी मूल रूप से अफ्रीका के हब्शी थे। इसलिए इस क्षेत्र को हबसाण कहा जाता था। जंजीरा की जगह पर पहले चट्टानों से बना लगभग चालीस एकड़ का मरुस्थल था। वहाँ पर किले जैसा कुछ नहीं था। पास के मुरुड गाँव में रामा पाटिल नाम का कोली रहता था। उसी साहसी नाविक ने उस चट्टान पर अपने रहने के लिए लकड़ी का घर बनाया था। इस टापू के पास से ईरान, इराक, इस्ताम्बुल और अफ्रीका की ओर से मुम्बई की ओर जहाज आते-जाते थे। उसी लकड़ी के मकान से रामा कोली व्यापार पर नियन्त्रण रखता था। उस समय निजाम के यहाँ रहने वाले सिद्दी ने रामा कोली को शराब के नशे में धुत करके अपनी सेना द्वारा उस लकड़ी के मकान पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद बुर्हाणखान ने उस कठोर चट्टान पर एक किला बाँधने की शुरुआत की और देखते-देखते विदेशी व्यापार पर अपनी हुकूमत चलाने लगा। उसी के कारण सिद्दी शक्तिशाली हो गये। वे किसी के मित्र नहीं थे। चारों ओर वे अत्यन्त स्वार्थी, धोखेबाज, घातक और जुल्मी के रूप में विख्यात थे। परन्तु पुर्तगाली, अँग्रेज और मुगल स्वयं सपेरे बनकर उन कालसर्पों को अपने इशारे पर नचाते थे। ये कालसर्प भी बहुत होशियार थे। उन्हें अपने कंठ के जहर और अपनी दहशत की पूरी जानकारी थी। इसलिए सिद्दी स्वयं कभी-कभी अपनी आँखें दिखाता और इन सँपेरों को ही अपनी धुन पर नाचने को मजबूर करता था। उनके मुँह में उठते बुलबलों को देखकर सिद्दी कालसर्प प्रसन्नता से अपनी पूँछ लहराता था। दोपहर में संभाजी महाराज दरबार में गये। उसी समय नगारखाने के दरवाजे मे दो-तीन सौ की संख्या में भेड़-बकरियों की तरह जनता वर्षा मे भीगती हुई महाराज के सामने आकर खड़ी हो गयी। ये लोग नागोठणा, आपटा और नगाव के क्षेत्र के आगरी, कोली और कुनबी थे। ये सभी लोग राजा के पैरों में गिरकर प्रार्थना कर रहे थे कि—'महाराज, हमें बचाओ उस हसवा के आतंक से। उसके सैनिक गाँव में आये और गाँव की जवान लड़कियों को उठाकर ले गये।' “हमारी लड़कियों का अब क्या होगा ? वे उनकी जिन्दगी बर्बाद कर देंगे। वह सिद्दी उन्हें गुलाम बनाकर मुम्बई के बाजार में बेच देगा।" बूढ़ी औरतें रो-रोकर चिल्ला रही थीं। उस जमात के मुखिया ने महाराज के पाँव पकड़ लिये। उन्होंने कहा, "सरकार उन सिद्दियों ने ऊधम मचा रखा है। वे जालिम हबशी हमें गुलाम बनाकर परदेश में ले जाते हैं और बेच देते हैं।" जनता की यह करुण कहानी सुनकर शम्भूराजा क्रुद्ध हो गये। इसके पहले ऐसी शिकायत नहीं आयी थी। महाराज ने 222 :: सम्भाजी