छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंक्रुद्ध स्वर में कविराज से पूछा—“कलश, सुनी आपने यह करुण कहानी? उस अंग्रेज वकील की आप बहुत प्रशंसा कर रहे थे न? बताइए ये सिद्दी किसके बल पर इतने मगरूर हो गये हैं?” “परन्तु राजन—?” “मेरे पिताजी जो कहते थे वह पूरी तरह सच है। घर में घुसा हुआ चूहा जिस प्रकार सबकी नींद उड़ा देता है, उसी तरह ये सिद्दी हमारे कोंकण के तट को खा रहे हैं। ये छुपकर वार करने वाले मायावी लोग एक ओर तो औरंगजेब के साथ समझौता करते हैं, दूसरी ओर मुम्बई के अंग्रेजों से सांठ-गाँठ करते हैं। इन विषैली औलादों का विनाश ही अपने लिए सुदिन होगा।” राजा ने जनता को आश्वस्त किया कि वे हब्शियों का ठीक-ठीक प्रबन्ध करेंगे। महाराज की बात से आश्वस्त होकर लोग वापस गये। शम्भूराजा ने कवि कलश से कहा, “आज शाम को उन अंग्रेज वकीलों को दरबार में ले आइए।” उस दिन गैरी और राबर्ट शम्भूराजा का आदर से अभिवादन करते हुए दरबार में खड़े रहे। गैरी ने शम्भूराजा के पैरों के पास हीरे-जवाहरात से भरी परात भेंट की थी। राजा का ध्यान परात की ओर आकर्षित करने के लिए राबर्ट आँखों से संकेत कर रहा था। उसके उन दयनीय संकेतों को देखकर महाराज ने धीमे स्वर में कहा, “आपके इस तुच्छ नजराने से हम प्रसन्न हो जाएँगे, यह आपका भ्रम है। इस तरह के निरर्थक लोभ दिखाकर हमें जीतने के सपने कभी मत देखो।” अंग्रेजी वकीलों को संभाजी राजा की आँखों में दहकता अंगारा दिख रहा था। वे अपने लाल कपड़ों में पूरी तरह सिमटकर पसीने से तरबतर हो रहे थे। घबराये हुए उन वकीलों ने दुभाषिये के माध्यम से शम्भूराजा से पूछा—“महाराज, हम गरीब फिरंगियों पर आप इतना क्रोध क्यों करते हैं?” “क्योंकि दिये हुए वचन को निभाना आप नहीं जानते। इससे पहले आपने शिवाजी महाराज के साथ जंजीरे के हब्शियों की कोई भी सहायता न करने का वादा किया था। उस समझौते की सारी शर्तों को आज पैरों के नीचे कुचल दिया है क्या? सिद्दी के बेड़ों को मुम्बई में आश्रय नहीं देते क्या? उनको गोला-बारूद मुहैया नहीं कराते क्या? अपना यह धन्धा चुपचाप बन्द करो नहीं तो याद रखो मुकाबला मेरे साथ होगा।” संभाजी राजा ने इतनी ही चेतावनी नहीं दी। उन्होंने दुभाषिये को फटकारते हुए कहा, “जहाँ वकीली महल में आप लोग ठहरे हैं, उसके समीप ही एक गहरी घाटी है। उस घाटी के पीछे किले के ऊपरी हिस्से में एक बहुत नोकीली जगह है। वह कभी दिखाया साहब लोगों को?” सम्भाजी :: 223