छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें‘‘अँ?...हाँ सरकार।...’’ ‘‘उस टीले पर बनी काल कोठरियाँ बड़ी जालिम हैं। जिस समय सिद्दी की सहायता के लिए तुम्हारी राजापुर की अँग्रेज मंडली पन्हाला के पास आयी थी उस समय मेरे पिताजी ने अँग्रेजों को पकड़कर दो वर्ष तक उन्हीं कालकोठरियों में रखा था। समझ में आया? यह सब अपने मालिकों को ठीक से समझा दीजिए। उन्हें बता दीजिए कि हब्शियों के मैत्री और हमारे साथ ऐसी मस्ती करेंगे तो उन्हें भी उन्हीं कालकोठरियों की सैर कराएँगे।’’ अँग्रेजों के वकील अपनी गर्दन झुकाए बाहर चले गये। इस अवसर पर उपस्थित कृष्णाजी कंक ने युवराज की प्रशंसा की— ‘‘महाराज! क्या हड़काया आपने इन गोरे बन्दरों को। देखिएगा चार दिन तक उन्हें ठीक से नींद भी नहीं आएगी।’’ शम्भूराजा मीठी हँसी हँसते हुए बोले, ‘‘इस तरह दम देने का मतलब है मुख से भाप का निकलना। इससे राज्य का कार्य चलता है क्या?’’ ऐसा कहते हुए राजा ने कवि कलश की ओर देखा। ‘‘राजापुर बन्दरगाह पर अपने दौलतखाने के पास अपनी पाँच हजार की नौसेना और पचास बेड़े हैं। उनसे कहो कि वे तैयार रहें। जंजीरे का सिद्दी ज्यादा मस्ती करे तो उसे उसी समय कुचलकर रख देंगे। बरसात के दिनों में यदि सिद्दी उन्हें इसी तरह आश्रय देता रहा तो उनके मुम्बई के सभी गोदामों को जलाकर खाक कर देंगे।’’ दो ‘‘कुछ भी करो, किन्तु यदि अपने राज्य और धर्म को बचाना है तो सबसे पहले इस कलुष को समाप्त करना होगा।’’ सोमाजी दत्तो बड़ी गम्भीरता से कह रहे थे। सिंहासनारोहण के समय सभी कर्मचारियों को मुक्त कर दिया गया था। राजाज्ञा के अनुसार उन्हें पहले जैसा मान सम्मान देने की घोषणा की गयी थी। परन्तु अभी तक कार्य का बँटवारा नहीं हुआ था। केवल बालाजी आवजी को चिटणीस का कार्य सौंपा गया था। बालाजी पीछे की सारी बातें भूलकर कार्य में व्यस्त हो गये थे। उनके पास थोड़ा भी समय नहीं था। मोरोपन्त के घर पर सभी की बैठक जमी थी। पान-सुपारी बँट रही थी, कुछ महत्त्वपूर्ण चर्चा चल रही थी। 224 :: सम्भाजी