भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 231, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 231

त्र्यम्बकेश्वर से काशी तक फैल गया है।" "कुछ बिगड़े दिमाग वाले लोग इस प्रकार की बेतुकी बाते कर रहे होंगे। परन्तु येसाजीबाबा, हमारे हंबीरराव, केसोजी त्रिमल, म्हालोजी घौड़पड़े आदि लोग क्या आज छोकरे हैं। शिवाजी महाराज के समय से हम कार्यभार संभाल रहे हैं। यह सारी वरिष्ठ मंडली आप के साथ है फिर इन सियारों के हुँआने की क्या चिन्ता?" कोंडाजी फर्जन्द ने कहा। राजद्रोह जैसे गम्भीर अपमान करने वालों को आपने जीवन दान दिया, उन्हें पद और मान-सम्मान दिया। गद्दारों को इतनी सुविधा तो शिवाजी महाराज के समय में बिलकुल नहीं थी।" हंबीरराव ने स्मरण दिलाया। "शम्भूमहाराज, हम पहले ही कह देना चाहते हैं। आप कुछ भी कीजिए किन्तु उस अण्णाजी दत्तो को फिर से पद पर वापस न लीजिए।" दादाजी देशपांडे और कोंडाजी फर्जन्द एक साथ बोले। "कोंडाजी बाबा, इतना एक पक्षीय निर्णय न लीजिए। अण्णाजी का पहले का योगदान बहुत बड़ा है।" शम्भूमहाराज ने कहा। थोड़ी देर बाद बालाजी चिटणीस बैठक में सम्मिलित हुए। महाराज ने उनसे कहा- "चिटणीस, स्वामी समर्थरामदास के पास दूत भेजिए। वे स्वयं समारोह में उपस्थित होने की कृपा करें, इस प्रकार का साग्रह अनुरोध मेरी ओर से निमन्त्रण में करें।" अनेक विषयों पर चर्चा हुई। रात को विलम्ब से बैठक समाप्त हुई। बिछौने में शम्भुराजा को नींद नहीं आ रही है। उन्होंने येसूबाई से पूछा- "आप क्या सोचती हैं? क्या करें इस अण्णाजी पन्त का?" "जो भी लेना हो, एक बार निर्णय लेकर मुक्त होइए, कठोर तो कठोर ही सही।" शम्भुराजा ने लम्बी साँस लेते हुए कहा, "अण्णाजी बहुत धूर्त व्यक्ति है। तैरती हुई मछली की तरह। हाथ में आते-आते फिसल जाने वाले। वे बड़े जोर शोर से यह प्रमाणित करना चाहते हैं कि वे और उनके साथ के कुछ अधिकारी ही शिवाजी महाराज के दरबार का सारा कार्य-भार संभालते थे। इस प्रसंग में मेरी स्थिति मोच खाये पैर जैसी हो गयी है। दौड़ो तो भी दर्द करता है, शान्त बैठो तो भी दर्द करता है।" लगभग छः वर्ष बाद रायगढ़ पर इतना बड़ा उत्सव हो रहा था राज्याभिषेक के लिए इतर प्रदेशों के और अपने प्रदेश के लाखों लोग रायगढ़ पर एकत्र हुए थे। राजपरिवार के अनेक रिश्तेदार सपरिवार रायगढ़ पर पहुँच गये थे। जिस प्रकार आषाढ़ी एकादशी के दिन, चन्द्रभागा नदी के किनारे बिट्ठल सम्भाजी 229