छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदिया। शम्भूराजा ने शहर के चारों ओर सैनिकों की एक कड़ी बना दी थी। बुरहानपुर के आक्रमण की सूचना बाहर न जाये इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा था। इस लूट के आक्रमण में अनेक पुराने योद्धा थे। कोई बारह वर्ष पहले तो कुछ बीस वर्ष पहले शिवाजी महाराज के साथ सूरत लूट चुके थे। वैसे ही बेशुमार धन यहाँ मिल रहा था। इसके लिए शम्भूराजा और हंबीरराव ने अलग अलग गुट तैयार किये। बुरहानपुर के तलघरों में भी पारों और गहदालों से खुदाई की जा रही थी। जमीन के पेट में छिपी लक्ष्मी खोद-खोदकर बाहर निकाली जा रही थी। सरकती रात के साथ सब काम ठीक ठाक हो रहा था। पास के एक वृक्ष के नीचे सेवकों ने एक आपातकालीन ठिकाना तैयार किया। वहीं दो बड़े पत्थरों पर शम्भूराजा और हंबीरराव समाधानपूर्वक बैठे थे। राजा के पेट में भूख के कारण चूहे कूद रहे थे। इसका अनुमान होते ही रायप्पा मक्के के भुने हुए हरे दाने ले आया। ताजे भुने हुए सोंधे दाने खाते हुए मामा भांजे आमने सामने बैठे थे। अब उजाला होने लगा था। पेड़ों पर पंछी बोलने लगे थे। शम्भूराजा के थके हुए किन्तु उत्साहित चेहरे की ओर देखकर हंबीर मामा बोले, "क्यों भांजे साहब ! पीछे पीछे आने की इतनी जल्दी क्यों मचा दी ? आपको 'मामेरा' नहीं मिल पाएगा। ऐसा भय लग रहा था क्या ?" "भांजे को भी अपने कर्तव्य पालन में कोई कोरकसर नहीं रखनी चाहिए, मामा साहब!" शम्भूराजा ने हँसते हुए कहा, राजा का काम केवल हीरे जवाहरात पहनकर दरबार में घूमना भर नहीं है। उसे रणभूमि में रक्त बहाकर अपने साथियो को प्रोत्साहित और तरोताजा भी करना होता है। उन्हें सजग बनाना होता है।" शम्भू महाराज के इस उदगार पर मामा भांजे दोनों खिलखिलाकर हँसे। हंबीरराव बीच में ही उठ गये। वे शहर के चारों तरफ के नाकों की जाँच कर रहे थे। उनका प्रयत्न था कि किसी भी हालत में एक भी जासूस इस आक्रमण का समाचार लेकर बाहर न जा सके। मराठों की लूटपाट चालू थी। हीरे मोतियों से बोरे भरे जा रहे थे। उन्हें ले जाने के लिए आसपास के गाँवों से गधे खच्चर आदि इकट्ठे किए जा रहे थे। लूटपाट करते दो दिन बीत गये। दोपहर को रायप्पा शम्भूराजा के कान में कहने लगा, "महाराज एक बहुत अच्छी खबर है। अरबी घोड़ों का एक बहुत बड़ा व्यापारी उस्मान खान यहाँ आया हुआ है। उसके पास दो हजार बहुत ही उमदा जानवर हैं।" "क्या कह रहे हो ? कहाँ है वह ?" शम्भूराजा उत्साहित होकर खड़े हो गए। "यहीं दमदमपुर के बाग में। बहादुरखान के औरंगाबाद चले जाने के कारण वह व्यापारी उसी के आने की प्रतीक्षा कर रहा है।" सम्भाजी · 247