छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 250, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंइतनी बड़ी अश्व सम्पत्ति इतने पास आकर रुकी हुई है, इसका पता चलते ही शम्भू महाराज का मन प्रफुल्लित हो गया। हंबीर मामा और गश्ती सेना को साथ लेकर शम्भूराजा वहाँ के लिए तुरन्त रवाना हो गये। दमदम बाग के उन घोड़ों को देखते हुए उनकी आँखें चकरा गयीं। इस तरह की चौड़ी पीठ वाले चुस्त दुरुस्त घोड़े उन्होंने कहीं देखे न थे। एक आसमानी रंग और बड़ी-बड़ी आयल वाले घोड़े की पीठ पर उन्होंने बड़े लाड़ से थाप मारी। सौदागर उस्मान महाराज के सामने काँपता हुआ खड़ा हो गया। उसकी ओर देखते हुए महाराज ने कहा, "ऐसी नस्ल, ऐसी जाति और ऐसी आँखें हमारे देश में तो सम्भव नहीं हैं। कहाँ से ले आये हो ये जानवर?" "अरबस्तान से।" "डरो नहीं, सीधे खड़े रहो। जैसे कोई शिल्पकार अपनी छेनी से शिल्पाकृति बनाता है वैसा ही जादू तुम्हारी उँगलियों में है।" शम्भूराजा से रहा नहीं गया। उन्होंने उस आसमानी रंग के घोड़े पर छलाँग लगाई। काठी और जीन न कसी होने पर भी वे घोड़े पर बैठ गये। लगाम खींचते ही घोड़ा आगे के पैर हवा में उछालते हुए हिनहिनाया। अपनी जगह पर ही पैर झाड़ते थैया-थैया नाचने लगा। उस्मान चिल्लाया- "राजा साहब ठहरिए! उसे दौड़ाइए नहीं, आप गिर जाएँगे, बहुत बदमाश जानवर है।" परन्तु शम्भू महाराज घोड़े के साथ अदृश्य हो गये। उनके पीछे-पीछे रायप्पा और अन्य गश्ती सैनिकों के घोड़े दौड़ पड़े। उस्मान अपना सिर पीटता वहीं खड़ा रहा। उसके गम्भीर चेहरे की ओर हंबीर मामा हँसते हुए देख रहे थे। बहुत देर बाद महाराज वापस लौटे। लौटने पर ऐसा लगा कि उस घोड़े और शम्भूराजा में जन्म जन्मान्तर की मित्रता हो गयी है। शम्भूराजा ने उस्मान से जानवरों की कीमत पूछी। पहले से ही घबराया हुआ उस्मान शम्भूराजा के पैरों में गिर पड़ा। दया की याचना करते हुए बोला- "मेरे आका मुझ गरीब का मजाक क्यों उड़ा रहे हैं? ये जानवर, ये पूरा तबेला मुफ्त में ले जाइए।" शम्भूराजा जोर से हँसे। हंबीर मामा ने भी सौदागर उस्मान को समझाया। अन्त में महाराज ने कहा- "जो उचित हो वह कीमत बताओ। हमें तुम्हारा एक भी जानवर मुफ्त में नहीं ले जाना है।" वह सौदागर मुस्कराया और साहस बटोरकर बोला- "अजी हुजूर आपने यहाँ दिन दहाड़े बुरहानपुर नगर को लूटा है और हमसे इन जानवरों की कीमत पूछ रहे हैं? हुजूर हमें चकमा देने का इरादा तो आपका नहीं है?" एक अभिजात हास्य शम्भूराजा के चेहरे पर तैर गया। उन्होंने कहा- "सौदागर, जिस परिश्रम और लगन से तुमने यह अश्वलक्ष्मी एकत्र की है, उसका 218 :: सम्भाजी