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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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अपमान करने का हमारा कोई इरादा नहीं है।" शम्भूराजा ने सारे घोड़े खरीद लिये। अपने खेमे पर पहुँचकर उन्होंने खंडो बल्लाल से धीमे स्वर में कहा-"खंडोबा! यह मौदागर जितना माँगे उसे उतना द्रव्य दीजिए। बुरहानपुर की लूट में से नहीं अपने खजाने से ही यह द्रव्य दीजिए।" महाराज के उद्गार को सुनकर खंडो बल्लाल और हंबीर मामा ठठाकर हँसे। तीसरे दिन सबेरे औरंगाबाद की ओर हरकारे आये। वे शम्भू महाराज को बताने लगे-"बहादुरखान कोकलताश को खबर लग गई है। भतीजी की शादी छोड़कर अपनी फौज के साथ इस ओर घूम पड़ा है। अपने फौजियों और घोड़ों को पानी के लिए भी हकने नहीं दे रहा है। लूट का द्रव्य इतना अधिक था कि उन्हें ढोकर ले जाने के लिए गधे और खच्चर कम पड़ रहे थे। शीघ्रता से बाँधा-बाँधी आरम्भ हो गयी।" दोपहर में ही सामानों से लदे गधे बुरहानपुर से बाहर निकलने लगे। उनकी पीठ पर एक करोड़ मोहरों की दौलत थी। आसपास के नागरिकों में काकरखान के प्रति बड़ा क्षोभ था। जजिया कर की वसूली में उसने हिन्दुओं को बहुत सताया था। उससे भेंट किये बिना शम्भूराजा को बाहर निकलना अच्छा न लगा। बुरहान के महल से पकड़कर मराठा सैनिक काकरखान को पकड़कर शम्भूराजा के पाम ले आये। डर के मारे वह पहले ही अधमरा हो गया था। राजा के हुक्म से उसके मखमली लिबास को उतारा गया। सैनिकों ने उसे एक पेड़ से बाँध दिया। कुछ लोगों ने उसे दो चार हाथ मारा भी। शम्भूराजा ने उसे चेतावनी देते हुए कहा, "फिर से अत्याचार करेगा तो याद रखना!" बुरहानपुर को लूटकर मामा भांजे प्रसन्नतापूर्वक वापस आ रहे थे। रास्ते में बहादुरखान कोकलताश के साथ मुठभेड़ की सम्भावना थी। इसके अर्तारक्त सूरत के बाद मराठे जिस जंगली रास्ते से गये थे उसका मुगलों को पता था। इसलिए इस बात की चिन्ता थी कि बिना किसी अवरोध के यह लूट की सम्पत्ति को लेकर कैसे जाया जाय? दुश्मन की ओर से अचानक हमला हो सकता था। इसलिए सेना में व्यूह रचना की आवश्यकता थी। इसलिए मामा भांजे ने मिलकर बीस हजार सेना को चार चार हजार की संख्या के हिसाब से पाँच भागों में बाँट दिया। हंबीरराव ने कहा, "शम्भूराजा! मेरा विचार है कि औरंगाबाद जीतकर ही हम रायगढ़ आएँ। दस-बारह हजार फौज मेरे लिए पर्याप्त होगी।" "मामाजी मेरे साथ पाँच हजार फौज पर्याप्त है।" शम्भूराजा ने कहा। "इतनी कम फौज के साथ जान जोखिम में नहीं डाला करते, शम्भू बेटे!" मामा ने अपनी राय व्यक्त की। निश्चित किया गया कि लूट का अधिकांश हिस्सा रास्ते में साल्हेर के किले सम्भाजी :. 249