भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 26, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 26

अण्णाजी दत्तो ने लज्जा से अपना सिर झुका लिया। महाराज भी बहुत शर्मिन्दा दिखाई दे रहे थे। उन्होंने क्रोध से येसूबाई की ओर नजर घुमायी। येसूबाई पर इस घटना का कोई भी प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा था। बल्कि एक तरह के अभिमान और आत्मविश्वास से वह अधिक तेजस्विनी प्रतीत हो रही थी। येसूबाई ने पन्त की बात काटते हुए सीधा प्रश्न किया—‘‘बिना प्रमाण के उल्टा-सीधा कोई भी आरोप लगाने का अधिकार किसी को भी नहीं है। जहाँ तक इज्जत का सवाल है, वह जैसे प्रजा को प्रिय होती है वैसे ही युवराज को भी।’’ येसूबाई के इस अचानक आक्रमण से पन्त कुछ लज्जित हुए। परन्तु महाराज ने बीच में हस्तक्षेप करके येसूबाई को रोक दिया—‘‘बहूरानी ! हो सकता है कि तुम पर पतिप्रेम का जादू चढ़ गया हो किन्तु पिता होने के नाते युवराज को हम तुमसे अधिक अच्छी तरह पहचानते हैं।’’ पहले से जिनके चारों ओर आरोपों की आँधी घूम रही थी। शम्भूराजा चुप थे। केवल सुन रहे थे। अब और अधिक उनसे चुप नहीं रहा गया। दुखी स्वर में शम्भूराजा बोले— ‘‘पिताजी दुख इसी बात का है कि हमसे कोई अपराध नहीं हुआ है फिर भी हमें अपराधी ठहराया जा रहा है। यह बहुत बड़ा अन्याय है पिताजी। आज की घटना की जाँच पड़ताल आप अवश्य कीजिए। जाँच के बाद आपको भी विश्वास हो जाएगा कि आज होली मनाने की जगह पर, ठीक शोभा यात्रा के समय तोपों से पटाखों की बारूद के बदले असली बारूद के गोले दागे जाने वाले थे। षड्यन्त्रकारी आपकी जान लेने पर तुले हुए थे, पिताजी। यही सूचना देने के लिए यह निष्पाप गोदू दौड़ी-भागती आयी। वह मूर्ख मान ली गयी और मैं बदनाम हुआ। ‘‘शम्भूराजा ! केवल काल्पनिक कथाओं के आधार पर राज काज नहीं चलाया जाता। उसके लिए ठोस सबूत की आवश्यकता होती है।’’ अण्णाजी पन्त का दबा हुआ गुस्सा भड़क उठा था। अपने उत्तराधिकारी पर खुलेआम आरोप लगाये जाने से बड़े महाराज भी बेचैन हो गये थे। इसी समय मुल्ला हैदर वहाँ आये। महाराज ने उन्हें बड़ी आशा भरी दृष्टि से देखा। उनकी न्यायबुद्धि पर महाराज को बहुत विश्वास था। साठ वर्ष के मुल्ला साहब अपनी पलकों को झपकाते हुए बोले, ‘‘महाराज ! आपकी आज्ञा के अनुसार बाघ दरवाजे की ओर पहुँचाये गये बारूद की हमने बारीकी से जाँच की। पता चला कि उसमें पटाखे की बारूद थी ही नहीं।’’ वहाँ उपस्थित सभी लोग आश्चर्यचकित हो गये। हिन्दवी स्वराज की राजधानी में इस प्रकार का घातक षड्यन्त्र चिन्ता का विषय था। मुल्ला हैदर ने 24 :: सम्भाजी