भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 265, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 265

"बस, कविराज, अपनी अकल को काबू में रखो। अपने को गागाभट्ट का बाप मत समझो। यह सब करने की जिम्मेदारी हमारी है। थोड़ा समय लगेगा। किंतु उनको दोष मार्जन करना पड़ेगा। इसकी विधि है। कुछ उपचार भी है। इस काम में आप गड़बड़ न करें।" दोपहर को दरबार में घटी घटना रात को अण्णाजी को मालूम पड़ी। उन्होंने अपने भाई को डाँटा—"सोमाजी, ऐसा अनर्थ मत कर। उस कलुषा को राजा ही समझो। शम्भूराजा अभी तरुण हैं। ऐसा खुला संघर्ष उन्हें अच्छा नहीं लगेगा। इसके अतिरिक्त श्रीबाग के कोल्हटकर और रसूल के कुलकर्णी जैसे विधर्मियों को दरबार में क्यों बुलाते हो? इस प्रकरण को एक बार मिट जाने दो, अधिक बातचीत की जरूरत नहीं है।" "इतनी चिन्ता क्यों करनी चाहिए उन विधर्मियों की? उधर जाकर इतना मजा किया। मांस खाया, मदिरा का सेवन किया। धार्मिक विधि के लिए, पाप प्रक्षालन के लिए कुछ खुले हाथ खर्च करने को कहते हैं तो हीलाहवाली करते हैं, गरीबी का ढोंग रचते हैं। कोंकण में इन लोगों के अच्छे-खासे बगीचे हैं।" अण्णा साहब ने पता लगाया कि दरबार में जमाराशि की जाँच पड़ताल कहाँ तक पहुँची? तब सोमाजी ने कहा— "ऐसी कौन-सी छानबीन चालू है? बड़े महाराज का शासन बहुत कठोर था। परन्तु वे भी बहुत त्रुटियों पर ध्यान नहीं देते थे। वे सच्चे जानकार राजा थे। भरा हुआ घड़ा हिलेगा तो थोड़ा-बहुत पानी इधर उधर छलकेगा ही? थोड़ा-बहुत पानी बाहर गिरेगा ही। कर्मचारियों के भी पेट है। बड़े महाराज को उनकी चिन्ता थी।" "दादा, आज रायगढ़ गरीब दुखियों का, कर्मचारियों का, सच्चे सेवकों का नहीं रहा। महारानी की तरह पूजापाठ करना छोड़कर वह येसूबाई कभी भी दरबार में आकर क्यों बैठती हैं? भगवान ही जानें। दरबार के कामकाज में, कागज पत्रों में क्यों दिमाग खपाती हैं?" "सच बात है। स्वयं महाराज महारानी और वह कपटी कलुषा, ऐसे तीन- तीन लोग पीछे लगेंगे तो साधारण सेवक अपनी सेवा कैसे दे सकेंगे?" अण्णाजो ने विवशता प्रकट करते हुए कहा। सम्भाजी :: 263